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अदालत ने अबू सलेम की तत्काल रिहायी के अनुरोध वाली याचिका खारिज की

मुंबई, 15 अप्रैल (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने गैंगस्टर अबू सलेम की तत्काल रिहायी के अनुरोध वाली याचिका बुधवार को खारिज कर दी, जिसमें उसने दावा किया था कि पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत भारत में उसने 25 साल जेल में बिता लिये हैं।

सलेम ने अपनी याचिका में दलील दी कि यदि अच्छे व्यवहार के लिए दी गई छूट को शामिल किया जाए, तो उसकी 25 साल की जेल की सजा पूरी हो चुकी है और इसलिए उसे रिहा कर दिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति ए एस गडकरी और न्यायमूर्ति के. खाता की पीठ ने कहा कि वह यह नहीं मान सकती कि 25 साल की जेल की सजा पूरी हो गई है, क्योंकि इस स्तर पर सजा में छूट के मुद्दे पर कुछ भी कहना अपरिपक्व होगा।

अदालत ने उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि किसी कैदी की सजा में छूट की गणना उसकी रिहायी से एक महीने पहले की जानी चाहिए। अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए, (सलेम द्वारा दायर) यह याचिका खारिज की जाती है।’’

विस्तृत आदेश की प्रति अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

वकील फरहाना शाह के माध्यम से दायर की गई सलीम की याचिका में कहा गया था कि 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के समय भारत ने आश्वासन दिया था कि उसे किसी भी हालत में मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा और उसकी कैद 25 साल से अधिक नहीं होगी।

सरकार ने सलेम की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सलेम ने केवल 19 साल जेल में बिताए हैं और उसकी समय से पहले रिहायी पर फैसला लंबित है।

सलेम को 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराया गया था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

भाषा

अमित माधव

माधव