गर्मी की शुरुआती और तेज लहर ने उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है। इस साल अप्रैल में ही कई जिलों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। आमतौर पर मई और जून के महीने में, पारा इतना ज्यादा चढ़ता दिखता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि इस लू की वजह गर्म पश्चिमी हवाएं और किसी भी सक्रिय मौसम प्रणाली का अभाव है। इस भीषण गर्मी का असर उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक केंद्र वाराणसी में साफ तौर पर देखा जा सकता है।
पवित्र घाट, जो आमतौर पर मंत्रोच्चार से गूंजते रहते हैं और श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ से गुलजार रहते हैं, वे अब लू के थपेड़ों के बीच शांत पड़े हैं। इस तेज गर्मी ने लोगों को घरों के अंदर रहने पर मजबूर कर दिया है, जिससे गंगा नदी के किनारे स्थित मशहूर घाट लगभग वीरान हो गए हैं। भीषण गर्मी नाविकों की रोजी-रोटी पर भी असर डाल रही है, जो घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर निर्भर हैं।
जो नावें कभी लगातार आने-जाने वालों को गंगा पार कराती थीं, वे अब चिलचिलाती धूप में यात्रियों का इंतजार करते हुए खाली पड़ी हैं। दिन के समय बाहर निकले कुछ पर्यटकों ने बताया कि उन्हें तेजी से बढ़ते तापमान का सामना करने में काफी मुश्किल हो रही है। मौसम विभाग ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि इस साल उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों में सामान्य से ज्यादा दिनों तक लू चलने का अनुमान है।
अप्रैल में सामान्य से ऊपर पहुंचा तापमान, लू का प्रकोप में उत्तर प्रदेश
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