उत्तर प्रदेश के संभल में करीब दो साल पहले 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे के विरोध में हिंसा भड़की थी. इसमें चार लोगों की मृत्यु हो गई थी, जबकि 30 से अधिक अधिकारी व पुलिसकर्मी घायल हो गए थे. इस मामले में 37 लोगों को नामजद करते हुए 3750 अज्ञात के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे. अब योगी सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र में रिपोर्ट पेश होने से पहले एक बार फिर सख्त कार्रवाई की है. उन्होंने हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा के तीसरे गुर्गे मुहल्ला खग्गूसराय के मोहम्मद वारिस के खिलाफ एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ) के तहत कार्रवाई की.
वारिस पर हिंसा में हथियार उपलब्ध कराने और गोली मारकर दो लोगों की हत्या करने का आरोप है. इससे पहले उसके साथी मुल्ला अफरोज और गुलाम पर भी एनएसए की कार्रवाई हो चुकी है. तीनों अपराधी जेल में बंद हैं. इन्हीं तीनों ने साठा के इशारे पर हिंसा की साजिश रची थी. यह बात मुल्ला अफरोज और गुलाम ने पुलिस की गिरफ्तारी के दौरान कबूल भी की है. बता दें, संभल हिंसा की एसआईटी रिपोर्ट विधानसभा के सत्र में पटल पर पेश की जाएगी.
पुलिस ने 19 जनवरी को मास्टरमाइंड शारिक साठा के गुर्गे मुल्ला अफरोज सहित दस उपद्रवी को गिरफ्तार किया था. मोहम्मद गुलाम को 20 फरवरी 2025 को संभल के रोडवेज बस अड्डे के पास से गिरफ्तार किया था. ऐसे ही 25 जनवरी को तीसरे गुर्गे वारिस को गिरफ्तार किया था. यह तीनों गुर्गे ही हिंसा को भड़काने में जुटे थे. इतना ही नहीं, मुख्य गुर्गा मुल्ला अफरोज प्रापर्टी डीलर के साथ साठा के लिए काम करता था. उसके इशारे पर दिल्ली, एनसीआर से लग्जरी गाड़ियां चोरी कर बंगाल, असम के साथ नेपाल तक भेजता था.
पूछताछ में अफरोज ने बताया था कि हिंसा के पीछे वर्षों से पुलिस के लिए चुनौती बना कुख्यात शारिक साठा है. उसने अपने गुर्गों को हथियार मुहैया कराकर हिंसा कराई थी. उसका साफ कहना था कि 10-20 को मार दोगे तो सरकार और प्रशासन बैकफुट पर आ जाएंगे. फिर हम सुरक्षित होकर काम करेंगे. हमें नेताओं का फुल सपोर्ट है. वह 2012 से दुबई में छिपे साठा के संपर्क में था.