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सीएम योगी ने किया ‘भारत आंतरिक इमरजेंसी 1975’ पुस्तक का विमोचन, आपातकाल के संघर्षों को किया याद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास पर पूर्व मंत्री और भाजपा नेता शतरुद्र प्रकाश की पुस्तक ‘भारत आंतरिक इमरजेंसी 1975’ का विमोचन किया। इस अवसर पर शतरुद्र प्रकाश ने मुख्यमंत्री को पुस्तक भेंट की। कार्यक्रम में भाजपा नेता रमेश मिश्रा और सीपी सिंह भी मौजूद रहे।

पुस्तक में वर्ष 1975 से 1977 के बीच देश में लागू आपातकाल और उस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगी पाबंदियों का विवरण दिया गया है। इसमें विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों, समाचारपत्रों पर सेंसरशिप तथा नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लेख है।

आपातकाल और लोकतंत्र की लड़ाई का दस्तावेज

पुस्तक में 25 जून 1975 से 23 मार्च 1977 तक की अवधि को भारतीय लोकतंत्र के कठिन दौर के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन और आपातकाल के विरोध में विभिन्न स्तरों पर हुए संघर्षों का विवरण है।

इसके अलावा जबरन नसबंदी, गरीब बस्तियों को हटाने और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया गया है। पुस्तक में उन कार्यकर्ताओं के संघर्ष को प्रमुखता दी गई है, जिन्होंने प्रतिबंधों और दमन के बावजूद विरोध जारी रखा।

शतरुद्र प्रकाश के संघर्ष और ‘रणभेरी’ का उल्लेख

पुस्तक में शतरुद्र प्रकाश के राजनीतिक जीवन और आपातकाल विरोधी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। वह वर्ष 1968 से 1973 के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से जुड़े रहे। इसके बाद उन्होंने बनारस में गरीबों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष किया। वर्ष 1974 में वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के सबसे कम उम्र के विधायकों में शामिल हुए।

पुस्तक में आपातकाल के दौरान उनकी पत्नी अंजना प्रकाश की गिरफ्तारी और भूमिगत रहकर विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं की गतिविधियों का भी उल्लेख है। इसमें ‘रणभेरी’ नामक साइक्लोस्टाइल बुलेटिन की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। इसके माध्यम से आपातकाल विरोधी विचारों और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े संदेशों को प्रसारित किया जाता था। पुस्तक का उद्देश्य आपातकाल के दौरान हुए संघर्षों, लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगी पाबंदियों और विरोध आंदोलनों से जुड़े अनुभवों को दर्ज करना है, ताकि उस दौर के घटनाक्रम को समझा जा सके।