समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, लोकतंत्र, एक्सप्रेसवे निर्माण और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयानों पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह और ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया है। दोनों नेताओं ने सपा सरकार के कार्यकाल और अखिलेश यादव के पुराने राजनीतिक फैसलों का हवाला देते हुए कई आरोप लगाए।
लोकतंत्र के मुद्दे पर भूपेंद्र सिंह का निशाना
चौधरी भूपेंद्र सिंह ने अखिलेश यादव के लोकतंत्र सेनानियों को 51 हजार रुपये सम्मान राशि देने के ऐलान पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ अखिलेश यादव लोकतंत्र की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के साथ राजनीतिक गठबंधन कर रहे हैं। भूपेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर इमरजेंसी लगाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे में अखिलेश यादव को अपने राजनीतिक रुख पर जवाब देना चाहिए।
एक्सप्रेसवे को लेकर लगाए आरोप
अखिलेश यादव के एक्सप्रेसवे से जुड़े बयानों पर भी भूपेंद्र सिंह ने निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण में अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में बने एक्सप्रेसवे का रूट निजी और पारिवारिक हितों को ध्यान में रखकर बदला गया था।
पत्रकारों की सुरक्षा पर भी उठाए सवाल
चौधरी भूपेंद्र सिंह ने सपा सरकार के दौरान शाहजहांपुर में एक पत्रकार को जिंदा जलाए जाने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मंत्री के खिलाफ खबर प्रकाशित करने के बाद पत्रकार पर हमला हुआ और अस्पताल में भी उसकी जान लेने की कोशिश की गई।
उन्होंने अखिलेश यादव के पत्रकारों के साथ व्यवहार पर भी सवाल उठाए। भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कई मौकों पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में उनकी जाति पूछी गई और सपा कार्यकर्ताओं द्वारा पत्रकारों के साथ मारपीट की घटनाएं हुईं।
ओम प्रकाश राजभर ने गठबंधन को लेकर साधा निशाना
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की कांग्रेस के साथ राजनीतिक नजदीकी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि बाद में अखिलेश यादव ने इसे अपनी बड़ी भूल बताया था। राजभर ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव और उत्तराखंड उपचुनाव का भी हवाला देते हुए सपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठाए।
इमरजेंसी को लेकर कांग्रेस पर हमला
राजभर ने इमरजेंसी के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव याचिका के मामले में अदालत के फैसले के बाद देश में इमरजेंसी लगाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान बड़ी संख्या में नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को जेल भेजा गया। राजभर ने सवाल किया कि कांग्रेस के साथ खड़े होकर अखिलेश यादव लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और पेंशन की बात किस आधार पर कर रहे हैं।
PDA को लेकर राजभर का अलग अर्थ
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाते हुए PDA का अर्थ 'परिवार, दौलतमंद और अपराधी' बताया। राजभर ने कहा कि सपा के पुराने कार्यकर्ताओं के बजाय धनवान और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को प्राथमिकता दिए जाने के आरोप लगते रहे हैं।
प्रतिनिधित्व को लेकर सपा पर सवाल
राजभर ने सपा में मुस्लिम और अन्य सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन से सपा के विधायक जीतते हैं, लेकिन राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देने के दौरान मुस्लिम नेताओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। उन्होंने PDA में सामान्य वर्ग और अन्य समुदायों के प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाया।
डिंपल यादव के चुनाव को लेकर आरोप
ओम प्रकाश राजभर ने डिंपल यादव के पूर्व निर्विरोध चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय विरोधी उम्मीदवारों पर दबाव बनाकर नामांकन वापस कराया गया था। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव की राजनीति परिवार और निजी हितों तक सीमित है। हालांकि, इन बयानों और आरोपों पर समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से इस प्रतिक्रिया के समय कोई अलग पक्ष इस सामग्री में शामिल नहीं है।