लखनऊ में मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना की शुरुआत के साथ छोटे और सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक कृषि ऋण की ब्याज दर घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक (एलडीबी) से मिलने वाले इस ऋण पर ब्याज दर पहले 11 प्रतिशत थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, एक समय यह दर 18 प्रतिशत तक थी, जिसे बाद में 14 और फिर करीब 11 प्रतिशत किया गया।
10 लाख के कर्ज पर ब्याज में 50 हजार रुपये का अंतर
ब्याज दर में कमी का असर किसानों के खर्च पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर 10 लाख रुपये के ऋण पर 11 प्रतिशत की दर से एक साल का साधारण ब्याज 1.10 लाख रुपये होता है। वहीं 6 प्रतिशत की दर से यह ब्याज 60 हजार रुपये होगा। यानी समान मूलधन पर एक साल के ब्याज में 50 हजार रुपये का अंतर होगा। हालांकि वास्तविक बचत ऋण की अवधि, किस्त और बकाया मूलधन के आधार पर अलग-अलग होगी।
पांच लाख किसानों को सस्ता कर्ज देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत अगले कुछ वर्षों में 5 लाख लघु और सीमांत किसानों को इस ऋण सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत खेती-बाड़ी और कृषि मशीनरी के लिए कम ब्याज पर दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के शुभारंभ के दौरान पांच किसानों को ऋण स्वीकृति पत्र भी दिए गए। इससे ट्रैक्टर, कृषि यंत्र और खेती से जुड़े अन्य बड़े खर्चों के लिए किसानों को संस्थागत ऋण लेने का विकल्प मिलेगा।
18 प्रतिशत से घटकर 6 प्रतिशत हुई ब्याज दर
एलडीबी से मिलने वाले कृषि ऋण पर ब्याज दर एक समय 18 प्रतिशत तक थी। इसे पहले 14 प्रतिशत और बाद में करीब 11 प्रतिशत तक लाया गया। अब मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत यह दर घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है।
इस तरह 18 प्रतिशत के पुराने स्तर की तुलना में वर्तमान ब्याज दर एक-तिहाई रह गई है। कम ब्याज वाला दीर्घकालिक ऋण खासतौर पर उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिन्हें खेती और कृषि मशीनरी में बड़े निवेश के लिए पूंजी की जरूरत होती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजना की शुरुआत के दौरान कहा कि किसान की समृद्धि से देश की समृद्धि जुड़ी है। योजना के जरिए किसानों को खेती में निवेश के लिए सस्ता संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।