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हरियाणा सरकार ने कोटक महिंद्रा बैंक से 127.27 करोड़ वसूले, अब किसी बैंक पर नहीं बकाया

सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए हरियाणा में एक बड़ी कार्रवाई के तहत पंचकूला नगर निगम ने कोटक महिंद्रा बैंक से 127.27 करोड़ रुपये की मूल राशि सफलतापूर्वक वसूल कर ली है। आधिकारिक बयान के अनुसार, हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) ने भी AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से 25 करोड़ रुपये की वसूली की है। वहीं, IDFC बैंक का पूरा बकाया पहले ही चुकाया जा चुका है। इन वसूलियों के बाद अब हरियाणा सरकार का किसी भी बैंक पर कोई बकाया नहीं है, जो सार्वजनिक धन प्रबंधन में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

डीआईपीआर के मुताबिक, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों और बैंकों को सख्त निर्देश दिए थे कि सरकारी बकाया की समय पर वसूली सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा, “सार्वजनिक धन की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है।” यह मामला राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच के बाद सामने आया, जिसमें पंचकूला नगर निगम के कोटक महिंद्रा बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट में गड़बड़ी पाई गई। ACB ने 24 मार्च को एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें बैंक की सेक्टर-11 शाखा के खातों और एफडी रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आईं।

जांच के दौरान बैंक और नगर निगम के रिकॉर्ड में बड़ा अंतर पाया गया। बैंक द्वारा दिखाए गए बैलेंस अपेक्षा से काफी कम थे, वहीं कुछ खाते आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं थे। इस मामले में पहली गिरफ्तारी बैंक के तत्कालीन रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव की हुई। शुरुआती जांच में सामने आया कि उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर नगर निगम को गलत और भ्रामक जानकारी दी, जिससे वित्तीय रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी हुई।

इसके अलावा, विजिलेंस टीम ने राजत दहरा को भी गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उसने बताया कि उसे 29 मई 2020 से 2025 के बीच दो बैंक खातों से 60 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली, जिसे बाद में कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया। इन लेन-देन की जांच जारी है। इस मामले में कोटक महिंद्रा बैंक के अज्ञात अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और आने वाले समय में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।