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तेलंगाना के DGP बी. शिवधर रेड्डी ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम मंदिर में पूजा-अर्चना की

तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) बी. शिवधर रेड्डी ने शुक्रवार को तिरुपति जिले स्थित प्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। यह दौरा 31 मार्च को माओवादी कैडरों से की गई उनकी अपील के कुछ दिन बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने उन्हें हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने का आग्रह किया था।

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की पहले की अपील को याद करते हुए डीजीपी ने माओवादियों से कहा कि वे भूमिगत जीवन छोड़कर अपने परिवारों के पास लौटें और समाज में शांतिपूर्ण जीवन अपनाएं। डीजीपी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में तेलंगाना पुलिस के प्रयासों से तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के विभिन्न रैंक के कुल 721 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। इनमें चार सेंट्रल कमेटी सदस्य, 19 स्टेट कमेटी सदस्य और 36 डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM) शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी लोगों को राज्य सरकार की व्यापक पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता और अन्य लाभ दिए गए हैं, जिससे वे अपने गांवों में सम्मानजनक जीवन जी सकें। डीजीपी ने अन्य राज्यों में सक्रिय तेलंगाना के माओवादी नेताओं—मुप्पाला लक्ष्मणा राव उर्फ गणपति (72), पुसुनुरी नरहरी उर्फ संतोष (57), वर्था शेखर उर्फ मंग्थु (51), जोड़े रत्नाबाई उर्फ सुजाता (68), नक्का सुशीला उर्फ रेला (51) और रंगबोयिना भाग्या उर्फ रूपी (43)—से भी आत्मसमर्पण कर पुनर्वास योजना का लाभ उठाने की अपील की।

उन्होंने विशेष रूप से सेंट्रल कमेटी सदस्य गणपति के लिए हैदराबाद में उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, जो स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने 7 मार्च को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी जिक्र किया, जब 130 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था और मुख्यमंत्री ने गणपति से व्यक्तिगत अपील की थी।

डीजीपी ने कहा कि राज्य की पुनर्वास नीति पर बढ़ते भरोसे के चलते अन्य राज्यों के माओवादी भी आत्मसमर्पण के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने माओवादियों के परिजनों से भी अपील की कि वे उन्हें समझाकर शांतिपूर्ण रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने दोहराया कि वर्तमान परिस्थितियों में समस्याओं का स्थायी समाधान केवल लोकतांत्रिक तरीकों से ही संभव है और माओवादी कैडरों से हिंसा छोड़कर विकास की प्रक्रिया में भागीदार बनने का आह्वान किया।