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घुसपैठियों को बचाने के लिए SIR का विरोध कर रही TMC, कोलकाता में बोले पीएम मोदी

West Bengal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस पर ‘‘घुसपैठियों के अपने वोट बैंक को बचाने’’ के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया का विरोध करने का आरोप लगाया उन्होंने दावा किया कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की वजह से कई क्षेत्रों की जनसांख्यिकी बदल गई है।

मोदी ने कोलकाता में ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखा हमला बोला और उस पर घुसपैठ को बढ़ावा देने, राज्य की जनसांख्यिकी को बदलने और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनावों से पहले ममता बनर्जी सरकार के लिए ‘‘उल्टी गिनती शुरू हो गई है’’। मोदी ने दावा किया कि कई जगहों पर ‘‘जनसांख्यिकी बदल गई है’, बंगाली हिंदुओं को ‘‘जानबूझकर अल्पसंख्यक बनाया जा रहा है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल उत्पीड़ित हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने का विरोध कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी को एसआईआर प्रक्रिया से डर लगता है क्योंकि इससे अवैध मतदाताओं के नाम हटा दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘ये लोग एसआईआर का विरोध इसलिए करते हैं ताकि घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से न हटाए जा सकें और मतदाता सूची को शुद्ध न किया जा सके। वे तो मृत व्यक्तियों के नाम भी हटाने को तैयार नहीं हैं।’’ मोदी ने दावा किया कि बंगाल में घुसपैठ सुरक्षा संबंधी एक बड़ा मुद्दा बन गया है और आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार ने चुनावी लाभ के लिए इसे बढ़ावा दिया है। मोदी ने आरोप लगाया, ‘‘तृणमूल शासन में बेरोकटोक घुसपैठ के कारण बंगाल के कई इलाकों की जनसंख्या संरचना बदल गई है। तृणमूल जानबूझकर कई इलाकों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक बना रही है।’’

एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में प्रक्रिया शुरू होने के बाद से, मतदाताओं की संख्या का लगभग 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख नाम हटा दिए गए हैं, जिससे राज्य में मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है।

इनके अलावा करीब 60.06 लाख मतदाताओं को ‘न्यायिक जांच के अधीन’ श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता निर्धारित की जाएगी। मोदी ने सत्तारूढ़ दल पर पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भागकर आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने का विरोध करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘जब उत्पीड़ित हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात आती है, तो तृणमूल इसका विरोध करती है क्योंकि वह उन्हें अपना वोट बैंक नहीं मानती है।’’ मोदी ने ममता बनर्जी सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन आपराधिक तत्वों के समर्थन से काम करता है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘तृणमूल सरकार गुंडों और अपराधियों के समर्थन से चलती है। जबरन वसूली और ‘कट मनी’ उनकी आय के स्रोत हैं। ऐसे गिरोहों को मजबूत करने के लिए वे घुसपैठियों को लाते हैं। घुसपैठियों के कारण बंगाल की रोटी, बेटी और जमीन खतरे में हैं।’’ प्रधानमंत्री ने तृणमूल पर मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग सहित संवैधानिक संस्थानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस निर्वाचन चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों को निशाना बनाने में व्यस्त है और यह शर्मनाक है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी के दिन गिने-चुने रह गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं तृणमूल कांग्रेस को याद दिलाना चाहता हूं कि उसके गुंडागर्दी के दिन खत्म हो रहे हैं। उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।’’ मोदी ने कहा कि राज्य में बीजेपी ‘‘सबका साथ, सबका विकास’’ के सिद्धांत पर सरकार चलाएगी। राजनीतिक धमकियों और हिंसा में कथित रूप से संलिप्त लोगों को चेतावनी देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मोदी ने कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस के वे गुंडे जो आपको धमकाते हैं, उनके दिन अब लदने वाले हैं। अपराधी कानून से डरेंगे। घुसपैठिए कानून से डरेंगे। तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले कानून से डरेंगे। ऐसे अपराधियों के लिए सिर्फ एक ही जगह होगी - जेल, जेल, जेल।’’

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल पर भय का माहौल बनाने का आरोप लगाते हुए मोदी ने दावा किया कि राज्य में मतदाताओं, विपक्षी दलों और यहां तक कि मीडिया को भी डराया-धमकाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया, ‘‘तृणमूल ने भय की राजनीति को अपना हथियार बना लिया है। मतदाताओं को धमकाया जा रहा है। विपक्ष को धमकाया जा रहा है। मीडिया को धमकाया जा रहा है। अगर कोई तृणमूल को वोट नहीं देता, तो उसे कहा जाता है कि वह बंगाली नहीं है। उससे कहा जाता है कि उसे सरकारी लाभ नहीं मिलेंगे।’’

मोदी ने विधानसभा चुनाव को राज्य के भविष्य के लिए एक निर्णायक लड़ाई बताया। उन्होंने लोगों से राजनीतिक बदलाव लाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कुछ लोग आपको डराने की कोशिश करेंगे। कुछ कहेंगे कि बदलाव असंभव है। लेकिन याद रखें, जब लोग कोई फैसला कर लेते हैं, तो कोई भी ताकत उन्हें रोक नहीं सकती।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ये चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं है। ये चुनाव बंगाल की आत्मा को बचाने का है। ये चुनाव ‘कट मनी’ को खत्म करने का है। यह चुनाव भय से मुक्ति पाने का है।’’ पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के उपरांत 28 फरवरी को अंतिम मतदाता प्रकाशित होने के बाद मोदी की राज्य की यह पहली यात्रा थी। पश्चिम बंगाल में इस साल अप्रैल में चुनाव होने की संभावना है।