हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका के फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणियों के कारण बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ा। कारोबार के दौरान BSE सेंसेक्स 284.52 अंक यानी 0.37% गिरकर 76,979.99 अंक पर पहुंच गया। वहीं NSE निफ्टी 50 में 58.10 अंक यानी 0.24% की गिरावट आई और यह 24,117.55 अंक पर रहा।
बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने कहा कि दुनियाभर के बाजार एक साथ कई बड़ी चिंताओं से जूझ रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव है, वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व की महंगाई को लेकर सख्त टिप्पणी से ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। दूसरी तरफ Nvidia के अच्छे नतीजों से AI सेक्टर को कुछ सहारा मिला है।
भारत के अलावा कई एशियाई बाजारों में भी गिरावट रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI 1.46%, ताइवान इंडेक्स 1.17% और जापान का निक्केई 1.08% गिरा। GIFT NIFTY में भी 0.61% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, सिंगापुर का Straits Times 0.45% और थाईलैंड का SET Composite 0.18% बढ़ा।
भारत के लिए महंगा कच्चा तेल बड़ी चिंता है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत लंबे समय तक 80-90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है तो इससे भारत के चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है और रुपये पर भी कमजोरी का दबाव आ सकता है।साथ ही, महंगे तेल से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा भी रहता है।
फिलहाल ब्रेंट क्रूड 2 डॉलर बढ़कर 90.10 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.69 डॉलर बढ़कर 85.09 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं सोने की कीमत में 30.07 डॉलर की गिरावट आई। HSL Prime Research के देवरश वकील ने कहा कि अमेरिकी फेड चेयर ने जैक्सन होल बैठक में महंगाई को लेकर सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि फेड को यह भरोसा होना जरूरी है कि महंगाई 2% के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।
बाजार ने इन टिप्पणियों को सख्त रुख के तौर पर देखा है। इससे सितंबर की बैठक में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों का असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही। Dow Jones Futures 157 अंक, S&P 500 करीब 0.25% और Nasdaq 0.52% नीचे रहा। वहीं भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार हफ्तों से लगातार उतार-चढ़ाव के बीच गिरावट का दौर जारी है। विदेशी निवेशकों (FIIs) ने करीब 150 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने करीब 12,500 करोड़ रुपये का निवेश किया।