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सोनू सूद ने गाजियाबाद के दुखद सुसाइड केस पर अपनी बात रखी

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की दर्दनाक मौत के बाद अभिनेता सोनू सूद ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर सख्त नियंत्रण की मांग की है। 4 फरवरी की रात गाजियाबाद के लोनी इलाके में 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीनों बहनें नाबालिग थीं। इस घटना के बाद सोनू सूद ने कहा कि बच्चों को मोबाइल फोन नहीं, बल्कि माता-पिता का साथ और समय चाहिए।

इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में सोनू सूद ने कहा कि आज के दौर में बच्चे डिजिटल दुनिया के दबाव में अकेले पड़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये बच्चे हारे नहीं थे, इन्हें अकेला छोड़ दिया गया था। ऑनलाइन और सोशल मीडिया की दुनिया में हमने अपने बच्चों को इतना दूर छोड़ दिया है कि हम उनकी खामोशी तक नहीं सुन पा रहे।”

सोनू सूद ने दोहराया कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा के अलावा सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि यह भूल जाते हैं कि हमारे घर में एक और सदस्य है—मोबाइल फोन और सोशल मीडिया—जिसके साथ बच्चे हमसे ज्यादा समय बिताने लगे हैं। बच्चों को मोबाइल नहीं, हमारी मौजूदगी चाहिए। उन्हें डांट नहीं, बातचीत चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि कई बार माता-पिता अनजाने में बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल थमा देते हैं, जिससे परिवारों के बीच संवाद और भावनात्मक जुड़ाव कम होता जा रहा है। सोनू सूद ने माना कि शिक्षा के लिए तकनीक जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सेहत को खतरे में नहीं डाला जा सकता।

उन्होंने अपील करते हुए कहा, “शिक्षा के लिए मोबाइल हो सकता है, लेकिन कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया नहीं। आइए मिलकर ऐसे नियम बनाएं, ताकि हमारे बच्चे हमारे साथ रहें, न कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के साथ।”

सोनू सूद ने अपनी पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “सोशल मीडिया इंतजार कर सकता है, बचपन नहीं।”

गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, तीनों बहनें एक ऑनलाइन टास्क-आधारित गेम से जुड़ी हुई थीं। यह घटना तड़के करीब 2:15 बजे टीला मोड़ थाना क्षेत्र के लोनी इलाके में हुई। मृतक बहनों की पहचान निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) के रूप में हुई है। अस्पताल पहुंचने पर तीनों को मृत घोषित कर दिया गया।

डीसीपी निमिष पाटिल ने बताया कि मौके से मिले सुसाइड नोट में लड़कियों के कोरियन कल्चर से प्रभावित होने का जिक्र मिला है, हालांकि किसी खास गेम का नाम नहीं लिखा गया है। घटना के वक्त परिवार के सभी सदस्य घर में मौजूद थे, लेकिन सो रहे थे।

घटना के प्रत्यक्षदर्शी अरुण कुमार ने बताया कि सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। उन्होंने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी।

सोनू सूद ने कहा कि सही मार्गदर्शन और सीमाएं न होने पर सोशल मीडिया बच्चों पर गहरा मानसिक दबाव डाल सकता है। उन्होंने संतुलित तकनीकी इस्तेमाल, माता-पिता की भागीदारी और उम्र के अनुसार नियम बनाने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।