Faridabad: सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला के सजीव और सांस्कृतिक वातावरण में इस वर्ष कला, परिधान और राष्ट्रभाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘शिखा’ज़ कारीगरी’ ने अपनी विशिष्ट थीम आधारित प्रस्तुति के माध्यम से फैशन रैंप को भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति में रूपांतरित कर दिया। यह केवल परिधानों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत की परंपराओं, संवेदनाओं और सृजनशीलता की जीवंत कथा थी।

आदिवासी जीवन से रेशमी वैभव तक
प्रारंभिक प्रस्तुति में भारत के आदिवासी जीवन और उनकी वस्त्र परंपराओं को सम्मानपूर्वक मंच पर प्रस्तुत किया गया। प्रकृति से गहरे जुड़े समुदायों की जीवनशैली, अनुष्ठान और संघर्ष की स्मृतियाँ कपड़ों की बनावट और रंगों में सजीव दिखाई दीं। विविधता के बावजूद उनमें एक साझा सांस्कृतिक आत्मा स्पष्ट थी।
जब साड़ी बनी चलायमान चित्रदीर्घा
संध्या का विशेष आकर्षण वह क्रम रहा, जिसमें साड़ी को एक चलायमान चित्रदीर्घा के रूप में प्रस्तुत किया गया। पिचवाई, पटचित्र, वारली, गोंड, मधुबनी, असमिया और चित्तारा कला से प्रेरित मौलिक हस्तचित्रों ने वस्त्र को कैनवास में बदल दिया।
“प्राइड ऑफ इंडिया – ऑपरेशन सिंदूर” ने जगाया राष्ट्रगौरव
कार्यक्रम का समापन “प्राइड ऑफ इंडिया – ऑपरेशन सिंदूर” शीर्षक प्रस्तुति के साथ हुआ, जो समकालीन राष्ट्रीय भावनाओं को समर्पित एक अनूठी श्रद्धांजलि थी। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक प्रसंग से जुड़ी इस प्रस्तुति ने वातावरण को भावनात्मक ऊँचाई प्रदान की।
महिला नेतृत्व वाली पहल का सशक्त उदाहरण
‘शिखा’ज़ कारीगरी’ औरंगाबाद, महाराष्ट्र स्थित एक महिला नेतृत्व वाली पहल है, जो वस्त्रों पर हस्तचित्रण के माध्यम से भारतीय पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित है।
संस्था भारत सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ पहल की आधिकारिक भागीदार है और वस्त्र मंत्रालय के ‘इंडिया हैंडमेड’ मंच से संबद्ध है। वर्तमान में लगभग सौ से अधिक सम्मानित कारीगर और कलाकार इस पहल से जुड़े हैं।
कार्यक्रम का संचालन फैशन निदेशक संदीपन वलखा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। अंत में दर्शकों की खड़े होकर दी गई तालियों ने इस आयोजन को 2026 के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले की उल्लेखनीय प्रस्तुतियों में स्थान दिलाया।