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ई-श्रम पोर्टल पर होगा एक करोड़ 'गिग वर्कर्स' का पंजीकरण, संसदीय समिति की सिफारिश

संसदीय समिति ने गिग वर्कर्स के पंजीकरण को ई-श्रम पोर्टल पर अनिवार्य करने और एग्रीगेटर कंपनियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करने की सिफारिश की है। श्रम, वस्त्र और कौशल विकास संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष बसवराज बोम्मई ने लोकसभा में ‘मांगों के अनुदान (2026-27)’ पर पंद्रहवीं रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में देश में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने, उचित वेतन सुनिश्चित करने और श्रम प्रशासन को आधुनिक बनाने के लिए कई अहम सुझाव दिए गए हैं।

समिति ने मौजूदा न्यूनतम पेंशन (EPS-1995), जो फिलहाल 1,000 रुपये प्रति माह है, को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने की सिफारिश की। साथ ही, बढ़ती महंगाई को देखते हुए राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (National Floor Level Minimum Wage) में वृद्धि और समय-समय पर स्वत: संशोधन की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) श्रमिकों को दुर्घटनाओं के बाद राहत मिलने में देरी होती है, इसलिए उन्हें समय पर ESI और PF योजनाओं का लाभ मिले, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। समिति ने राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP) को सर्व शिक्षा अभियान के साथ विलय पर पुनर्विचार करने और बाल श्रम उन्मूलन के लिए अलग संस्थागत ढांचा बनाने का सुझाव भी दिया।

आधुनिक अर्थव्यवस्था में सामाजिक सुरक्षा के तहत, समिति ने गिग वर्कर्स के लिए ई-श्रम पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण और एग्रीगेटर कंपनियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की बात कही, ताकि इन श्रमिकों को बीमा और दुर्घटना कवरेज जैसे लाभ मिल सकें। रोजगार सृजन के लिए समिति ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सिफारिश की, ताकि जुलाई 2027 तक 3.5 करोड़ नौकरियां सृजित करने का लक्ष्य पूरा हो सके।

इसके अलावा, नए श्रम संहिताओं के तहत बढ़ी जिम्मेदारियों को देखते हुए, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी (DGMS) में खाली पदों को जल्द भरने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत बताई गई। रिपोर्ट में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के लिए स्थायी समन्वय एवं संवाद बोर्ड बनाने की भी सिफारिश की गई है। समिति ने जोर देकर कहा कि ये सभी कदम देश में एक अधिक न्यायसंगत, सुरक्षित और संगठित श्रम बाजार बनाने के लिए जरूरी हैं।