ईरान की सत्ता में बड़ा बदलाव हुआ है.अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है. यह फैसला ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने लिया. अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में मौत हो गई थी. करीब एक हफ्ते तक चली चर्चा के बाद 56 साल के मोजतबा खामेनेई के नाम पर बहुमत सहमति बनी. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी समर्थन दिया है. एक बयान में कहा गया कि सुप्रीम लीडर का हर आदेश मना जाएगा और वह अपनी जान कुर्बान करने को भी तैयार हैं. इससे ईरान और इजरायल का युद्ध और बढ़ता दिख रहा है.
नए सुप्रीम लीडर के चयन में खामेनेई की उस सोच को भी ध्यान में रखा गया कि ईरान का शीर्ष नेता ऐसा होना चाहिए जिसे दुश्मन पसंद न करें. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मोजतबा खामेनेई का ईरान का सुप्रीम लीडर बनना उनके लिए स्वीकार्य नहीं है. ट्रंप ने कहा कि वह ऐसा नेता चाहते हैं जो ईरान में शांति और स्थिरता लाए और अमेरिका व इजरायल के साथ अच्छे संबंध रखे. उन्होंने यह भी कहा कि जरूरी नहीं कि ईरान लोकतांत्रिक देश बने, लेकिन वहां ऐसा नेता होना चाहिए जो न्यायपूर्ण तरीके से शासन करे. इस बीच CIA के पूर्व प्रमुख डेविड पेट्रेयस ने भी मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि उनके पिता की तरह वह भी सख्त विचारधारा वाले नेता हो सकते हैं, जिससे ईरान की नीतियों में नरमी की उम्मीद कम दिखती है. उनका कहना है कि वह भी परमाणु कार्यक्रम और मिसाइलों पर जोर दे सकते हैं. वहीं इससे पहले इजरायल ने रविवार को कहा कि खामेनेई के नए उत्तराधिकारी को निशाना बनाया जाएगा.
मोजतबा खामेनेई अयातुल्ला अली खामेनेई और मंसूरेह खोस्तेज बाघेरजादेह के दूसरे बेटे हैं. उनका जन्म 6 सितंबर 1969 को ईरान के मशहद शहर में हुआ था, जो शिया मुसलमानों का बड़ा धार्मिक केंद्र माना जाता है. उनका बचपन उस दौर में बीता जब उनके पिता शाह की राजशाही के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय थे. उस समय खामेनेई को कई बार शाह की सीक्रेट पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद परिवार तेहरान आ गया, जहां मोजतबा ने अलावी हाई स्कूल में पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने कुम के धार्मिक मदरसों में इस्लामी शिक्षा हासिल की और उन्हें होज्जतोलइस्लाम का धार्मिक दर्जा मिला.
मोजतबा खामेनेई ने पढ़ाई पूरी करने के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़ाव बनाया. बताया जाता है कि उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के आखिरी वर्षों में हबीब बटालियन के साथ भी भूमिका निभाई थी. हालांकि उनके पास कोई बड़ा सरकारी पद नहीं रहा, लेकिन उन्हें लंबे समय से ईरान की सत्ता के भीतर एक मजबूत ‘शैडो पावर’ माना जाता रहा है. माना जाता है कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के कार्यालय के कई अहम काम संभाले और IRGC तथा खुफिया एजेंसियों के साथ उनके मजबूत रिश्ते रहे. अमेरिका ने 2019 में उन पर प्रतिबंध भी लगाया था. अमेरिकी ट्रेजरी का आरोप था कि मोजतबा खामेनेई बिना किसी निर्वाचित पद के भी अपने पिता के प्रतिनिधि के रूप में सत्ता में प्रभाव रखते थे.
मोजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि ईरान की व्यवस्था परंपरागत रूप से पिता से बेटे को सत्ता सौंपने के खिलाफ रही है. शिया धार्मिक व्यवस्था में भी इस तरह की उत्तराधिकार प्रणाली को पसंद नहीं किया जाता. इसके बावजूद उनका चयन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ईरान में कठोर रुख रखने वाला धड़ा अभी भी सत्ता में मजबूत बना हुआ है.