New Delhi: इसी महीने की दूसरी तारीख को संसद से जन विश्वास विधेयक पास हुआ था। इसे छोटे अपराधों को कानूनी सजा की श्रेणी से बाहर करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक ये विधेयक सभी क्षेत्रों में अनुपालन नियमों को सरल बनाता है और न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम करता है।
यह छोटे, तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूक के लिए कारावास के जोखिम को कम करता है और उनकी जगह आर्थिक दंड का प्रावधान करता है। इस विधेयक के तहत 79 केंद्रीय कानूनों के कुल 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है और 1,000 से ज्यादा अपराधों को तर्कसंगत बनाया गया है।
इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य प्रक्रियात्मक और गैर-गंभीर उल्लंघनों के लिए जुर्माना लगाना है, जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्रभावित करने वाले अपराधों के लिए सख्त कार्रवाई का प्रावधान बरकरार रखा गया है। उद्योग जगत के नेताओं का कहना है कि इस विधेयक से अदालतों पर बोझ कम होगा और अनुपालन प्रक्रिया सरल हो जाएगी। उनका यह भी कहना है कि इन सुधारों से देश में व्यापार करने में आसानी और भी बढ़ेगी।
सरकार का दावा है कि ये विधेयक विश्वास-आधारित नियामक प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। कुल मिलाकर, जन विश्वास विधेयक से अधिक संतुलित और व्यवसाय-अनुकूल नियामक वातावरण बनने की उम्मीद है, इसके साथ ही जनहित का दावा भी किया जा रहा है।
ये विधेयक विशेष रूप से लघु और सूक्ष्म व्यवसायों के लिए लाभदायक होगा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की सही मायने में रीढ़ हैं।