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लोकसभा में परीक्षा सुधार संशोधन विधेयक पेश, विपक्ष ने किया बड़ा हंगामा

सोमवार को विपक्षी सांसदों के जोरदार नारेबाजी के बीच केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। यह विधेयक पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है। हालांकि, विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसद 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विरोध करते रहे।

विपक्ष ने सरकार पर इस मुद्दे पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि युवाओं पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया और सरकार को इस पर माफी मांगनी चाहिए और जिम्मेदारी लेनी चाहिए। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पहले भी कानून बनाए गए थे, लेकिन उनका क्या हुआ? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पहले बनाया गया कानून कमजोर या गलत था। उन्होंने कहा कि नया कानून लाने से पहले मौजूदा कानून को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए था।

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों और छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर बिहार में छात्रों के खिलाफ AK-47 के इस्तेमाल को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर AK-47 से गोली चलाने का दावा पूरी तरह गलत है और राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए।

इस बीच बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) ने विधेयक पर चर्चा के लिए चार घंटे का समय तय किया है। NDA की ओर से भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या समेत कई युवा सांसद चर्चा में हिस्सा लेंगे। इनके अलावा JDU के आलोक कुमार सुमन, TDP के लावू श्रीकृष्ण देवरायालु, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, NCP के सुनील तटकरे, अपना दल की अनुप्रिया पटेल और LJP (राम विलास) के अरुण भारती समेत अन्य सांसद भी चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं।

प्रस्तावित विधेयक में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में सात बड़े संशोधन किए जाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य परीक्षा से जुड़े मामलों की समयबद्ध जांच और सुनवाई, दोषियों के लिए सख्त सजा और कानून को प्रभावी तरीके से लागू करना है। विधेयक के प्रमुख प्रावधानों के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित करने का अधिकार दिया जाएगा। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई कर चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का प्रस्ताव है। वहीं, जांच को दो महीने के भीतर पूरा करने का प्रावधान रखा गया है।

संशोधन के तहत केंद्र सरकार को परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाने का अधिकार भी दिया जाएगा। राज्य सरकारें ऐसे मामलों के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेंगी। इसके अलावा दोषियों के लिए जेल की सजा बढ़ाने, अधिक आर्थिक जुर्माना लगाने और हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने समयबद्ध अपील की व्यवस्था का भी प्रस्ताव है।

यह विधेयक NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच लाया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य देश की परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए व्यापक सुधारों की सिफारिश करना है।