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मेरठ कार हादसे में मृतकों की हुई पहचान, जांच के दौरान सामने आई दिल दहलाने वाली तस्वीरें

मेरठ में चलती कार में जिंदा जले 4 लोगों की पहचान हो गई। मृतकों में मां-बेटे और 2 अन्य लोग हैं। हादसे की रोंगेट खड़ी करने वाली तस्वीर सामने आई है। चारों की बॉडी इस कदर जली कि कंकाल तक सिकुड़ गए। कार के नाम पर केवल मैटल बॉडी बची है। आग बुझाने पहुंचे फायर फाइटर प्रवीन कुमार ने बताया- लोगों के जलने की गंध से साथी पुलिसकर्मियों को उल्टी होने लगी। 1 किमी दूर तक जलने की बदबू फैली थी। आग बुझने पर टॉर्च जलाकर देखा तो रोंगटे खड़े हो गए। कंकाल इस पोजिशन में थे, जैसे बचने के लिए अंदर छटपटाए हों। हाथ-पैर से कांच तोड़ने की कोशिश की, लेकिन कांच भी नहीं टूटे।

कार में चारों लोगों इस कदर जल गए कि कंकाल भी सिकुड़ गए। मृतक गाजियाबाद और नोएडा के रहने वाले मृतकों की पहचान गाजियाबाद के मानसरोवर पार्क लाल कुआं निवासी ड्राइवर ललित (20) और उनकी मां रजनी (40) के रूप में हुई है। ये दोनों मूल रूप से बुलंदशहर के मोहम्मदपुर कीरी के रहने वाले थे। वहीं, दो अन्य मृतकों में नोएडा के खेड़ा धरमपुरा निवासी राधा (29) और गाजियाबाद के तिबड़ा गांव निवासी कविता (50) हैं।

परतापुर फायर स्टेशन के फायर फाइटर प्रवीन ने बताया-सूचना मिलते ही हम लोग अपनी टीम लेकर निकले। डेढ़ किमी दूर से धुआं उठता दिख रहा था। मौके पर पहुंचे तो कार आग का गोला बनी थी। मांस जलने की तेज गंध के कारण वहां खड़ा होना मुश्किल था। गंध के कारण हमारे साथी को वहीं उल्टी हो गई। किसी तरह हम लोगों ने नाक पर रुमाल रखकर ऑपरेशन शुरू किया। आग बुझने पर हम लोग टॉर्च जलाकर कार के पास गए। अंदर देखा तो रोंगटे खड़े हो गए। गाड़ी में 1 या 2 नहीं, बल्कि 4 कंकाल थे। कंकाल ऐसी हालत में थे कि मानो उल्टा तवा हो। कार सवार 4 लोगों की जल कर मौत हो गई। आग बुझने के बाद फायर टीम को 4 डेडबॉडी मिली हैं।

वही प्रवीन ने बताया कि आग इतनी भयंकर थी कि कार के शीशे प्रेशर से टूट चुके थे। कार में कंकालों और CNG सिलेंडर के अलावा कुछ नहीं मिला। सिलेंडर एकदम लाल अंगार हो चुका था। अगर हम लोग चंद सेकेंड और देरी से पहुंचते तो सिलेंडर ब्लास्ट हो जाता। सिलेंडर का तापमान उस वक्त 100 डिग्री से कहीं ज्यादा था। हम लोगों ने फौरन सिलेंडर कूल किया। वहां से लोगों को हटाया। पूरा रास्ता ब्लॉक करके डायवर्ट कर दिया। उन्होंने बताया- ड्राइवर का सिर पीछे की सीट की ओर और कमर का हिस्सा स्टीयरिंग से ऊपर था। पीछे की सीट पर भी दोनों कंकाल भी विंडो से कूदने वाली पोजिशन में मिले। इससे साफ है कि कार सवारों ने खुद को बचाने का पूरा जोर लगाया। कार की विंडो से कूदने की कोशिश की, लेकिन सेंट्रल लॉक खुला नहीं और सभी ने छटपटाते-छटपटाते दम तोड़ दिया।

प्रत्यक्षदर्शी मोनू ने बताया कि भोला झाल के पास मेरी नर्सरी है। हम लोग अपनी नर्सरी पर बैठे थे। रात 9:15 बजे अचानक हमने देखा की रास्ता डायवर्ट किया गया है। हमें लगा कुछ हो गया है। मैं यहां आया तो पता चला कि कार में लोग जल गए हैं। पुलिस, प्रशासन की टीमें यहां थी। 4 लाशें गाड़ी में थीं। यशपाल ने बताया कि किसी ने हमसे कहा वहां नहर पटरी पर आग लगी है। अचानक हम गांव वाले इधर आए। आग की लपटें दूर से ऐसी दिखाई दे रही थीं, हमें लगा जंगल में आग लग गई होगी। लेकिन, यहां आए तो देखा कार जल रही थी। हमने दूसरे गांव वालों को बताया। पुलिस की कई गाड़ियां मौके पर आईं। कार में 4 लोगों के कंकाल मिले थे।

एसपी देहात कमलेश बहादुर सिंह ने बताया कि कार के अंदर 4 डेडबॉडी मिली हैं। चारों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। आग कैसे लगी इसकी जांच की जा रही है। ये कार जानी नहर पुल की ओर से भोला झाल नहर पुल की ओर जा रही थी। संभवत: कार सवार दिल्ली से हरिद्वार जा रहे होंगे। घटना की जांच के लिए देर रात SSP ने फायर और फोरेंसिक विभाग को मिलाकर एक जॉइंट जांच टीम बनाई। देर रात तक की जांच के अनुसार, कार में CNG सिलेंडर बाहर से लगवाया गया था। कार 2010 मॉडल की है। लग रहा है कि कार को किसी गैराज से मॉडिफाई कराया गया था।

कार के डैशबोर्ड और उसके आसपास गैस लीक से आग लगने जैसा लग रहा है। AC में शॉर्ट सर्किट के बाद गैस लीक हुई और आग लगी। आग लगने पर कार का सिस्टम फेल हो गया। कार की विंडो, डोर सब लॉक हो गए। कोई बाहर नहीं निकल सका।