Breaking News

दतिया विधानसभा सीट उपचुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह 6016 वोट से जीते     |   ‘प्रशांत किशोर को बांकीपुर उपचुनाव में जीत के लिए बधाई’, CM सम्राट का एक्स पोस्ट     |   अरुणाचल: भूस्खलन से NH-13 पर आवाजाही बाधित, CM पेमा खांडू ने केंद्र से मदद मांगी     |   PoK ब्रॉड पीक एवलांच: 3 और पर्वतारोहियों के शव बरामद, अब तक 8 की मौत, 2 अब भी लापता     |   मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव: BJP प्रत्याशी सतीश पटेल 30 हजार 630 वोट से जीते     |  

पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी मामला: दिल्ली पुलिस ने नहीं दर्ज की रेगुलर एफआईआर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी तक कोई नियमित एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।  नोएडा पुलिस की ओर से पिछले सप्ताह एक जीरो एफआईआर भेजी गई थी, लेकिन दिल्ली में इसे अभी तक नियमित एफआईआर में बदला नहीं गया है। ऐसे में फिलहाल एफआईआर वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता। इससे पहले रविवार को आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर युवाओं को "डराने" का आरोप लगाया। उन्होंने मामले में शामिल युवती के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वह उसके साथ खड़े हैं।

केजरीवाल ने कहा, "मोदी जी ने रुचिका सिंह के साथ जो किया, वह कायराना हरकत है। रुचिका के साथ ऐसा करके आप युवाओं के अंदर डर पैदा करना चाहते हैं। लेकिन अब युवाओं के दिल से आपका और आपकी पुलिस का डर खत्म हो चुका है। आप एक रुचिका को डराएंगे तो दस और रुचिकाएं आपके खिलाफ सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करेंगी। रुचिका, मैं तुम्हारे साथ हूं। अगर तुम्हें कभी किसी भी तरह की मदद की जरूरत हो तो हमें बताना।"

वहीं, शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर नोएडा की एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज किए जाने की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल की निंदा की जा सकती है, लेकिन लोगों को निशाना बनाने और परेशान करने के लिए पुलिस और आपराधिक न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करना अब आपराधिक अपराध बन गया है।

सौरव दास ने कहा कि लोकसभा के करीब 50 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें दुष्कर्म, हत्या और डकैती जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को निशाना बनाकर उन्हें उदाहरण बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सरकार और पुलिस से युवाओं को परेशान करना बंद करने और इस मामले में युवती को निशाना नहीं बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस बल का कथित दुरुपयोग पूरी तरह अस्वीकार्य है।

सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी पोस्ट कर कहा कि पुलिस को युवाओं को निशाना बनाने के बजाय आपराधिक मामलों का सामना कर रहे सांसदों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया और पुलिस पर आपराधिक तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

यह घटनाक्रम कुछ दिनों बाद सामने आया है, जब नोएडा पुलिस ने CJP के 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में एक महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। यह मार्च NEET पेपर लीक के विरोध में आयोजित किया गया था। वहीं, पेपर लीक को रोकने के लिए कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से संसद ने गुरुवार को सार्वजनिक परीक्षाओं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित किया। प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।