पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI और ED की कार्रवाई को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। धूरी के बरवाल गांव में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मान ने कहा कि पंजाब में जांच एजेंसियां कुछ नहीं खोज पाएंगी और खाली हाथ लौटेंगी।
उन्होंने केंद्र सरकार को चुनावों के लिए तैयार रहने की बात कहते हुए कहा कि चाहे पश्चिम बंगाल हो या दिल्ली, चुनाव होने वाले हैं। मान की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब CBI ने मंगलवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित एक घर में तलाशी ली थी। यह कार्रवाई पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन और उनके सहयोगियों से जुड़े मामले में की गई।
CBI को मोबाइल फोन और चैट मिलने का दावा
वहीं दिल्ली के पर्यावरण मंत्री और भाजपा नेता मंजिंदर सिंह सिरसा ने भगवंत मान पर पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि CBI की प्रेस रिलीज में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, मोबाइल फोन और करीब 200 पेज की चैट जब्त किए जाने की बात कही गई है।
सिरसा ने आरोप लगाया कि इन चैट में GLADA और GMADA से जुड़े कथित हजारों करोड़ रुपये के घोटालों से संबंधित जानकारी है। उन्होंने कहा कि जांच आगे बढ़ने पर इन मामलों से जुड़े तथ्य सामने आएंगे।
सिरसा ने यह भी आरोप लगाया कि सबूत मिटाने के लिए करीब 50 मोबाइल फोन नष्ट किए गए। उन्होंने कहा कि CBI के पास पहले से चैट मौजूद हैं और आरोपी जांच से बच नहीं सकते।
पंजाब BJP अध्यक्ष ने कहा- हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि CBI की कार्रवाई भाजपा के कहने पर नहीं, बल्कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई है। उन्होंने कहा कि ED ने पंजाब पुलिस को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन जब कार्रवाई नहीं हुई तो मामला हाईकोर्ट पहुंचा। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार ED और CBI ने जांच शुरू की।
भाजपा नेता ने AAP सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कोई गलत काम नहीं हुआ है तो सरकार को जांच से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधित दस्तावेज सामने रखने चाहिए, ताकि CBI जांच के जरिए सच्चाई स्पष्ट हो सके।
OSD राजबीर सिंह घुम्मन पर भ्रष्टाचार के आरोप
दरअसल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया था। इसके बाद CBI ने घुम्मन और उनके सहयोगियों के खिलाफ FIR दर्ज की।
CBI के अनुसार, आरोपों में IAS और IPS अधिकारियों समेत अन्य अधिकारियों की पोस्टिंग को प्रभावित करना, विभागीय कार्यवाही, नीतियां बनाने, प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग और जमीन से जुड़े मामलों में कथित तौर पर आर्थिक लाभ के बदले हस्तक्षेप करना शामिल है।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने सरकारी आदेशों और नीतियों के जारी होने से पहले उनके ड्राफ्ट निजी लोगों तक पहुंचाए। मामले में CBI की जांच जारी है।