मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी में नौवें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए भेजे जाने वाले पोषाहार की सप्लाई एक शराब माफिया करता था। उन्होंने दावा किया कि उस समय तीन-तीन महीने तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर राशन नहीं पहुंचता था और बच्चों को अपना टाट लेकर आना पड़ता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय आंगनबाड़ी केंद्रों पर न पेयजल की व्यवस्था थी, न शौचालय और न ही बच्चों के लिए गर्म भोजन। उन्होंने कहा कि लखनऊ में बैठे लोगों की गलतियों का खामियाजा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भुगतना पड़ता था और उन्हें ही लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ती थी।
सीएम योगी ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद जब उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति की समीक्षा की तो पूरा सिस्टम बदहाल मिला। पोषाहार की गुणवत्ता और उसके नियमित वितरण को लेकर भी कई सवाल थे। इसके बाद सरकार ने व्यवस्था में बदलाव शुरू किया। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया है। मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण और नवीनीकरण पर 30 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर चहारदीवारी, शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में फिलहाल 1.90 लाख आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। 897 बाल विकास परियोजनाओं के जरिए हर महीने करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। वहीं 35.46 लाख बच्चों को हॉट कुक्ड मील दिया जा रहा है, जबकि करीब 46 लाख बच्चों के वजन और स्टंटिंग की नियमित निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक होम राशन (THR) की व्यवस्था को भी पारदर्शी बनाया गया है। प्रदेश में अब तक 204 टीएचआर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं, जिनका संचालन महिला स्वयं सहायता समूह कर रहे हैं। इससे 20 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने बताया कि पोषाहार की गुणवत्ता की जांच भारत सरकार की संस्था से कराई जा रही है। पोषाहार के परिवहन से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया में GPS ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा प्रत्येक पैकेट पर QR कोड लगाया जा रहा है, जिससे उसकी डिजिटल ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित हो सके। सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को केवल 3 हजार रुपये और सहायिकाओं को 1,500 रुपये मानदेय मिलता था। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया गया है।
उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं और उनके परिवार को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा भी दिया जा रहा है। अब तक 1.56 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। बाकी कार्यकर्ताओं को भी स्मार्टफोन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इन स्मार्टफोन के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों का रियल टाइम डाटा अपलोड किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार पोषण माह को पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित किया गया है। इनमें विविध और पर्याप्त प्रोटीन वाला पोषक आहार, आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताजा गर्म भोजन, सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही, पोषण के साथ प्रारंभिक बाल विकास और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के जरिए गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आर्थिक सहायता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ खाना देना पर्याप्त नहीं है। भोजन संतुलित, पौष्टिक और स्वादिष्ट भी होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मूंग की दाल की खिचड़ी में गाजर और अन्य सब्जियां मिलाने से उसका स्वाद, रंग और पोषण तीनों बढ़ जाते हैं। बच्चा खुशी से खाना खाएगा, तभी पोषण अभियान का उद्देश्य पूरा होगा।
सीएम योगी ने कानपुर के एक आंगनबाड़ी केंद्र का अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वह बिना पूर्व सूचना के वहां पहुंचे थे। उस समय करीब 20-22 बच्चे खेल-खेल में अंक और शरीर के अंगों के बारे में सीख रहे थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि तीन साल की एक बच्ची ने कहा, “एक-एक-एक, मेरी नाक एक”, जबकि दूसरे बच्चे ने कहा, “दो-दो-दो, मेरी आंख दो।” उन्होंने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों को पोषण देने के साथ-साथ उनकी शुरुआती शिक्षा की भी मजबूत नींव बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चे के जीवन के पहले एक हजार दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चा, स्वस्थ बच्चे से सक्षम विद्यार्थी और सक्षम विद्यार्थी से कुशल युवा तैयार होता है। यही युवा आगे आत्मनिर्भर और विकसित भारत की नींव मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ इस वर्ष की थीम ‘मेरी आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है।
सीएम योगी ने बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले बड़ी संख्या में बेटियां नंगे पैर स्कूल जाती थीं। अब 1.60 करोड़ बच्चों को दो यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.36 लाख स्कूलों को बेहतर बनाया गया है। बालवाटिका के बच्चों को भी दो यूनिफॉर्म देने की तैयारी की जा रही है। माध्यमिक शिक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट अलंकार के तहत करीब 2,100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार किया गया है। स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर और अटल टिंकरिंग लैब जैसी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत काशी ने अपनी पुरातन पहचान को सुरक्षित रखते हुए नया स्वरूप हासिल किया है। आज काशी नई आभा के साथ पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी तरह गांवों और गलियों से पोषण, शिक्षा और कौशल की मजबूत नींव रखकर आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण किया जाएगा।
कार्यक्रम में संबोधन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छोटे बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों को दुलारा और उन्हें खिलौने, टॉफी और चॉकलेट दी। मुख्यमंत्री ने बच्चों को गोद में लेकर उनका अन्नप्राशन कराया और उन्हें माला पहनाई। इसके बाद उन्होंने विभिन्न राज्यों से लगाए गए पोषाहार संबंधी स्टॉलों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने वहां खाद्य सामग्री, हाथ से बने खिलौनों, जड़ी-बूटियों और पौधों के बारे में जानकारी ली। बिहार के स्टॉल पर मौजूद महिलाओं ने मुख्यमंत्री को मोमेंटो भेंट किया।