मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब शहर की दूरी गांव के बच्चों की पढ़ाई में बाधा नहीं बन सकती। प्रदेश के 57,600 गांवों तक डिजिटल लाइब्रेरी पहुंचने से ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाई के लिए आधुनिक संसाधन उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने कहा कि संसाधन करीब आए हैं तो बच्चों और युवाओं के सपनों की राह भी आसान हुई है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर डिजिटल लाइब्रेरी से ग्रामीण क्षेत्रों में आए बदलाव की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पहले प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गांव के बच्चों को किताबों और बेहतर संसाधनों के लिए शहर जाना पड़ता था। इसमें समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। अब डिजिटल लाइब्रेरी ने इस दूरी को काफी कम कर दिया है।
गांव में ही किताब, कंप्यूटर और डिजिटल कंटेंट
सीएम योगी ने बहराइच के तेजवापुर ब्लॉक स्थित खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी का उदाहरण दिया। ग्राम पंचायत सचिवालय में तैयार इस लाइब्रेरी में किताबों और आधुनिक तकनीक को एक साथ उपलब्ध कराया गया है।
यहां कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी उपलब्ध है। यानी बच्चों और युवाओं को पढ़ाई के लिए किताबें और डिजिटल कंटेंट दोनों गांव में ही मिल रहे हैं।
पढ़ाई में लग रहा शहर आने-जाने का समय
मुख्यमंत्री ने कहा कि संसाधन करीब आने से बच्चों और युवाओं के लिए पढ़ाई के अवसर बढ़े हैं। वे डिजिटल लाइब्रेरी में अध्ययन करने के साथ ई-लर्निंग से जुड़ रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। पहले शहर आने-जाने में लगने वाला समय और पैसा अब उनकी पढ़ाई में इस्तेमाल हो रहा है।
76 स्थानों से 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंच
सीएम योगी ने बताया कि यह बदलाव केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। 2017 से पहले ई-लाइब्रेरी की पहुंच राज्य और जिला स्तर के करीब 76 स्थानों तक सीमित थी। अब डिजिटल लाइब्रेरी 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल शिक्षा को स्कूलों तक सीमित न रखते हुए करीब 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। प्रदेश में 32,000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15,000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब के जरिए शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है।
शिक्षा के संसाधनों में हुआ बदलाव
मुख्यमंत्री ने 2012-16 की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान पर्याप्त सरकारी निधि होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की उपलब्धता से लेकर उनकी पहुंच तक उत्तर प्रदेश ने लंबी दूरी तय की है। इस बदलाव से अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ा है, क्योंकि बच्चों को आधुनिक शैक्षिक संसाधनों के लिए अब गांव से दूर नहीं जाना पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत सचिवालय बन रहे ज्ञान के केंद्र
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ग्राम पंचायत डिजिटल लाइब्रेरी पहल का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। ग्राम पंचायत सचिवालय अब प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ ज्ञान और तकनीक के केंद्र के रूप में भी नई भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी इस बदलाव की तस्वीर है। गांव में पढ़ाई का माहौल बदल रहा है और ‘ज्ञान की रोशनी’ अब बच्चों के द्वार तक पहुंच रही है।