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"सिर्फ बिल काफी नहीं, पेपर लीक रोकने वाले सिस्टम की जरूरत है"- पेपर लीक पर बोले शशि थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को कहा कि पेपर लीक से निपटने के लिए सरकार की ओर से लाया गया विधेयक "पर्याप्त नहीं" है। उन्होंने कहा कि जरूरत ऐसे सिस्टम की है, जिससे पेपर लीक की घटनाओं को होने से पहले ही रोका जा सके। लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा करते हुए तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि भाजपा के वक्ताओं ने पिछली सरकारों के दौरान हुए पेपर लीक के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं होना चाहिए कि किस पार्टी के शासन में ज्यादा पेपर लीक हुए, बल्कि सवाल यह होना चाहिए कि सिस्टम खराब है और इसे कैसे ठीक किया जाए।

थरूर ने कहा कि अगर कोई बच्चों के सपनों को बेच रहा है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 10 साल की जेल, 10 करोड़ रुपये का जुर्माना या सरकार द्वारा तय कोई भी सजा दी जा सकती है, लेकिन यह कार्रवाई बहुत देर से हो रही है। उनके मुताबिक, सजा तब मिलती है जब सरकार पहले ही विफल हो चुकी होती है और पेपर लीक हो चुका होता है। जरूरत ऐसे सिस्टम की है, जिससे पेपर लीक को पहले ही रोका जा सके, न कि अपराध होने के बाद दोषियों को सजा दी जाए।

फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के सरकार के प्रस्ताव पर भी थरूर ने सवाल उठाए। उन्होंने 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले साल फास्ट ट्रैक अदालतों में 1.44 लाख मामले दर्ज हुए, जबकि केवल 66 हजार मामलों का निपटारा हो सका। वहीं, 2.5 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अतिरिक्त जज, कोर्ट रूम और सरकारी वकीलों की नियुक्ति नहीं करती है, तो इस विधेयक के तहत अपेक्षित परिणाम हासिल करना मुश्किल होगा।

थरूर ने कहा कि मौजूदा फास्ट ट्रैक कोर्ट पहले से ही भारी दबाव में हैं। उन्होंने एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान CBI का वकील तक मौजूद नहीं था। ऐसे में केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक के आरोपी को सजा मिलने तक छात्रों को पहले ही भारी नुकसान हो चुका होता है। थरूर ने कहा कि 21 छात्रों ने आत्महत्या की है और उनके माता-पिता ने अपने बच्चों से बहुत उम्मीदें लगाई थीं, लेकिन उनके सपने बिखर गए। उन्होंने कहा कि केवल दोषियों को सजा देने के लिए कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को लेकर की गई और बाद में सदन की कार्यवाही से हटाई गई टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर थरूर ने कहा कि उन्होंने वह बात नहीं सुनी। उन्होंने कहा कि टिप्पणी सदन की कार्यवाही से हटा दी गई है, इसलिए उन्हें पता नहीं कि वास्तव में क्या कहा गया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी एक जिम्मेदार नेता हैं और उन्हें भरोसा है कि उनके बयान के पीछे पूरी जानकारी होगी।

इस बीच, शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें रात करीब 10:40 बजे लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक पर बोलने का मौका मिला। समय की कमी के कारण उन्हें अपनी बात संक्षिप्त करनी पड़ी और उन्हें केवल नौ मिनट मिले। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य संदेश यही था कि विधेयक पेपर लीक करने वालों के लिए सजा बढ़ाता है, लेकिन जरूरत सिस्टम को ठीक करने की है ताकि अपराध होने ही न पाए।

मंगलवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर लंबी चर्चा हुई, लेकिन चर्चा पूरी नहीं हो सकी। विधेयक में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है। मौजूदा कानून में कम से कम तीन साल और अधिकतम पांच साल की जेल का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर न्यूनतम पांच साल और अधिकतम 10 साल करने का प्रस्ताव है। वहीं, अधिकतम जुर्माने को भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।