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छत्तीसगढ़ में AI खेती की योजना, अनुमान नहीं अब डेटा से होगा फैसला

Chhattisgarh: धान का कटोरा कहलाने वाला छत्तीसगढ़ अब डिजिटल और AI आधारित खेती का नया चेहरा बनने की राह पर बढ़ चला है। खेती की सबसे बड़ी बाधा अनिश्चितता को खत्म करने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित खेती पर जोर दिया जा रहा है। इससे किसान अब अनुमान और किस्मत आधारित खेती नहीं बल्कि डेटा, तकनीक और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर कृषि संबंधित फैसले ले सकेंगे।

राज्य के धमतरी जिले के किसान अब लाभकारी खेती के लिए मोबाइल, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले के 20 से अधिक गांवों के 6000 से अधिक किसानों के साथ इसकी शुरुआत की गई है। किसान AI आधारित मोबाइल एप, मिट्टी और नमी मापने वाले सेंसर, मौसम पूर्वानुमान तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन तकनीकों की सहायता से किसान जान पा रहे हैं कि सिंचाई कब करनी है, खाद कितनी और कब डालनी है और उनकी फसल किस बीमारी से प्रभावित होने वाली है। ऐसे में वक्त रहते समाधान आसान हो जाता है।

खेती में AI के इस्तेमाल से खेती की लागत में 20-30 प्रतिशत तक की कमी और उत्पादन में बढ़ोतरी में मदद मिल रही है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सलाह GENERAL नहीं बल्कि पर्सनलाइज्ड होती है। यानी हर किसान को उसकी परिस्थितियों के मुताबिक सटीक सलाह मिलती है।

कृषि के क्षेत्र में चुनौतियों से निपटने के लिए AI आधारित कृषि आज के समय में स्मार्ट, सस्ता और भरोसेमंद समाधान है। परंपरा के साथ तकनीक का इस्तेमाल करने से खेती घाटे का नहीं बल्कि फायदे का सौदा बन सकती है।