योगी सरकार की तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था को वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रान्तीय सिविल सेवा (PCS) 2025 बैच के 38 प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ का भ्रमण किया। इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने आधुनिक फॉरेंसिक जांच की बारीकियां समझीं। प्रशिक्षु अधिकारियों ने संस्थान में स्थापित DNA लैब और ड्रोन लैब का अवलोकन किया। उन्हें अपराध की वैज्ञानिक जांच में इन तकनीकों के इस्तेमाल और उनके महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
‘कानून और विज्ञान का संगम ही फॉरेंसिक विज्ञान’
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि फॉरेंसिक साइंस के माध्यम से सच्चाई को वैज्ञानिक तरीके से कानून के सामने लाकर न्याय दिलाने में सहयोग करना संस्थान का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि फील्ड में सिविल सेवा की जिम्मेदारी चुनौतीपूर्ण होती है और इसके लिए त्याग, समर्पण और विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना जरूरी है।
डॉ. गोस्वामी ने कहा कि कानून और विज्ञान का संगम ही फॉरेंसिक विज्ञान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश के अधिकारियों को फॉरेंसिक विज्ञान की बारीकियों से परिचित कराया जा रहा है। उन्होंने नए कानूनों के संदर्भ में न्याय, सत्य और साक्ष्य के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में फॉरेंसिक विज्ञान बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। साइबर और फॉरेंसिक तकनीक आधुनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं, क्योंकि लोगों की तकनीक पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।
प्रशिक्षु अफसरों को समझाया गया मृत्युकालिक बयान
डॉ. गोस्वामी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को मृत्युकालिक बयान के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब यह आशंका हो कि पीड़ित की मृत्यु हो सकती है और तत्काल बयान दर्ज नहीं किया गया तो महत्वपूर्ण साक्ष्य खत्म हो सकता है, ऐसी स्थिति में मृत्युकालिक बयान की जरूरत पड़ती है।
उन्होंने बताया कि पुलिस या चिकित्सक की सूचना पर मजिस्ट्रेट पीड़ित की भाषा में उसका बयान दर्ज कर सकता है। ऐसा बयान कानूनी रूप से ग्राह्य साक्ष्य हो सकता है। उन्होंने संभव होने पर बयान के समय डिजिटल रिकॉर्डिंग कराने की बात भी कही। डॉ. गोस्वामी ने बताया कि यदि पीड़ित बोलने में सक्षम नहीं है, लेकिन लिखकर बयान देने की स्थिति में है, तो उसका लिखित बयान भी मृत्युकालिक बयान माना जा सकता है।
इस अवसर पर संस्थान के अपर निदेशक संजीव सुमन ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संस्थान की गतिविधियों और कार्यप्रणाली की जानकारी दी। कार्यक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, पलक अनेजा, सेंथिल शिव सुब्रमण्यम, जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार तिवारी, आरआई शैलेन्द्र सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।