योगी सरकार में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने देशभर से चुनी गई 27 सर्वश्रेष्ठ प्रशासनिक पहलों में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के तीन मॉडल शामिल किए हैं। इनमें बहराइच का सामुदायिक सौर ऊर्जा आधारित आजीविका मॉडल, मिर्जापुर का महिला किसान उत्पादक संगठन और गोरखपुर का बायोफ्लॉक मत्स्य पालन मॉडल शामिल हैं।
इन मॉडलों की कार्यप्रणाली और सफलता का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की टीम ने तीनों जिलों का दौरा कर स्थलीय सत्यापन किया। कैबिनेट सचिवालय के अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इन पहलों को दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक बताया।
बहराइच में सौर ऊर्जा से 100 एकड़ खेतों की सिंचाई
केंद्रीय टीम ने 14 अक्टूबर को बहराइच के मिहिनपुरवा विकासखंड की घूमना भारू ग्राम पंचायत का दौरा किया। यहां ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) के सहयोग से 43 किलोवाट पीक क्षमता का सामुदायिक सोलर माइक्रोग्रिड स्थापित किया गया है।
इस परियोजना के तहत करीब 200 परिवारों की 100 एकड़ कृषि भूमि में 10 सौर पंपों से सिंचाई की सुविधा मिल रही है। ग्राम विद्युत समिति ई-रिक्शा, ई-स्कूटी और मोबाइल चार्जिंग जैसी सेवाएं भी संचालित कर रही है। इससे ग्रामीणों को स्वच्छ ऊर्जा के साथ आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं।
मिर्जापुर में 1,221 महिलाएं चला रहीं किसान उत्पादक संगठन
केंद्रीय टीम ने 19 अक्टूबर को मिर्जापुर के छानबे विकासखंड में छनवर एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का निरीक्षण किया। वर्ष 2022-23 में स्थापित इस किसान उत्पादक संगठन का संचालन महिलाएं करती हैं। वर्तमान में इससे 1,221 महिला शेयरधारक जुड़ी हैं।
संगठन की महिलाएं कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री, जैविक खाद का उत्पादन, कृषि उपकरण उपलब्ध कराने और उत्पादों के विपणन जैसे काम कर रही हैं। महिलाओं ने अधिकारियों को बताया कि सामूहिक प्रयास से उन्होंने 25 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति सफलतापूर्वक पूरी की है।
संगठन वर्तमान में करीब 10.50 लाख रुपये का व्यावसायिक मार्जिन अर्जित कर रहा है, जो उसके वार्षिक संचालन खर्च से अधिक है। संगठन का लक्ष्य सभी महिला सदस्यों की आय बढ़ाकर उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाना है।
केंद्रीय टीम ने विंध्य मार्ट का भी निरीक्षण किया। यहां स्वयं सहायता समूहों के स्थानीय उत्पादों की बिक्री और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों की जानकारी ली गई। इस दौरान वन प्रिया योजना, सौर ऊर्जा से सिंचाई और जलवायु के अनुकूल ग्रामीण विकास की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
गोरखपुर में बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन
केंद्रीय टीम ने 26 अक्टूबर को गोरखपुर के खजनी विकासखंड की छताही ग्राम पंचायत का दौरा किया। यहां जल परी प्रेरणा महिला मत्स्य उत्पादक समूह की महिलाएं बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर रही हैं।
ग्राम पंचायत में पांच बायोफ्लॉक इकाइयां स्थापित की गई हैं। इस तकनीक के जरिए सीमित स्थान और नियंत्रित जल व्यवस्था में मछली पालन किया जा सकता है। इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन कर आजीविका के अवसर बढ़ा रही हैं। समूह की महिलाओं ने केंद्रीय टीम को अपनी गतिविधियों की जानकारी दी और भविष्य में बायोफ्लॉक इकाइयों की संख्या बढ़ाने की योजना भी साझा की।
दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बने यूपी के मॉडल
भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने सभी राज्यों से बेहतर प्रशासनिक कार्यों और नई पहलों की जानकारी मांगी थी। इनमें से 27 पहलों का चयन किया गया। इनके सत्यापन के लिए नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के सहयोग से अधिकारियों की टीमें संबंधित राज्यों में भेजी गईं।
इसी क्रम में अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश के तीन जिलों का भ्रमण किया। उन्होंने विशेष रूप से बहराइच के सामुदायिक सौर माइक्रोग्रिड मॉडल को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा की। इन पहलों को आगे बढ़ाने में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला प्रशासन, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया, सहयोगी संस्थाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
योगी सरकार के इन मॉडलों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने, महिलाओं की आय में सुधार करने और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान से इन सफल पहलों को दूसरे क्षेत्रों में अपनाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।