उत्तर प्रदेश में छात्राओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार स्कूलों में मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन (एमएचएम) व्यवस्था को मजबूत कर रही है। इसका उद्देश्य छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी सही जानकारी और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि इस विषय पर झिझक दूर हो और बेटियां आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
प्रदेश में अब तक 68,358 विद्यालयों में एमएचएम क्लब गठित किए जा चुके हैं, जबकि 66,045 स्कूलों में पैड बैंक स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 63,633 विद्यालयों में बच्चों और 63,928 विद्यालयों में शिक्षकों के साथ मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता सत्र आयोजित किए जा चुके हैं।
योगी सरकार की एमएचएम व्यवस्था केवल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। स्कूलों में एमएचएम क्लब और पैड बैंक के माध्यम से छात्राओं को जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता गतिविधियां भी कराई जा रही हैं।
शनिवार को मीना मंच के तहत होने वाली गतिविधियों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन और महत्वपूर्ण आपातकालीन सहायता नंबरों से जुड़े सत्र भी शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को जरूरी जानकारी देना और इस विषय पर सहज संवाद का माहौल तैयार करना है।
विद्यालयों में मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों और प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। 13 और 14 अगस्त 2026 को राज्य परियोजना कार्यालय में 209 मास्टर ट्रेनर्स की राज्य स्तरीय कार्यशालाएं आयोजित की गई थीं।
इसके बाद 9 से 25 सितंबर 2026 के बीच प्रदेश के 450 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूरा हुआ। इससे स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी जानकारी और जागरूकता गतिविधियों को बेहतर तरीके से पहुंचाने में मदद मिलेगी।
मासिक धर्म स्वच्छता को शिक्षा का हिस्सा बनाने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश ने भी पहल की है। प्रचलित पाठ्यक्रम पर आधारित पाठ्यपुस्तकों में मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी जागरूकता संबंधी विषयवस्तु शामिल की गई है।
इसके अलावा किशोर और किशोरियों के लिए साप्ताहिक गतिविधि आधारित पुस्तिका ‘प्रगति के पंख’ में भी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियां शामिल की गई हैं। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच इस विषय पर खुलकर बातचीत करने का माहौल बनाने में मदद मिलेगी।
प्रदेश के स्कूलों में छात्राओं को बेहतर माहौल देने के लिए स्वच्छ शौचालय, पानी, हाथ धोने की सुविधा, सैनिटरी नैपकिन, पैड बैंक और इस्तेमाल किए गए नैपकिन के सुरक्षित निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही शिक्षक प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार बेटियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को प्राथमिकता दे रही है। स्कूलों में ऐसा सुरक्षित और सहज वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जहां मासिक धर्म उनकी पढ़ाई या आत्मविश्वास में बाधा न बने।
उन्होंने कहा कि एमएचएम क्लब, पैड बैंक, जागरूकता सत्र और मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के जरिए इस व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि हर बेटी को जरूरी सुविधाएं, सही जानकारी और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।