वाराणसी में जलभराव की समस्या को लेकर योगी सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के निर्माण खंड (वि./यां.) में तैनात अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत विभागीय जांच भी शुरू की गई है। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन और गोईठहां एसटीपी पर 3 और 4 सितंबर को पम्प बंद रहे।
भारी बारिश के दौरान समय पर पम्प नहीं चलने से सीवर लाइनों पर दबाव बढ़ा और शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। जांच में यह भी पाया गया कि चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन पर नदी के बैकफ्लो को रोकने के लिए जरूरी गेट या बैरियर लगाने का आकलन और कार्ययोजना तैयार नहीं की गई थी। इसके अलावा उच्चाधिकारियों के निर्देशों के मुताबिक भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने 12 और 13 सितंबर को वाराणसी का दौरा कर जलभराव प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया था। उन्होंने जल निकासी की व्यवस्था को युद्धस्तर पर दुरुस्त करने और लोगों को किसी तरह की परेशानी न होने देने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने जलभराव की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
शासन ने निलंबित अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबन अवधि के दौरान मुख्य अभियंता (कानपुर क्षेत्र), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), कानपुर कार्यालय से संबद्ध किया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। इस मामले में मुख्य अभियंता (क्रय), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), लखनऊ को पदेन जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।