उत्तर प्रदेश में पैक्ड पेयजल की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर और पैक्ड मिनरल वॉटर के 242 नमूनों में से 146 अधोमानक और 57 माइक्रोबायोलॉजिकल जांच में असुरक्षित पाए गए हैं। इसके बाद विभाग ने संबंधित इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने 13 अक्टूबर को जारी आदेश में असुरक्षित नमूने मिलने वाली इकाइयों के खाद्य लाइसेंस निलंबित करने और उनका उत्पादन तत्काल बंद कराने को कहा है। वहीं, अधोमानक नमूने मिलने वाली इकाइयों को सुधार नोटिस जारी कर गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ई. कोलाई और हानिकारक बैक्टीरिया की मौजूदगी से बढ़ी चिंता
जांच रिपोर्ट में कुछ नमूनों में ई. कोलाई, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड जैसे सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी सामने आई है। विभाग के अनुसार, पानी में इस तरह के सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। इसी वजह से असुरक्षित नमूने मिलने वाली इकाइयों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है।
जांच में सफल होने के बाद ही शुरू होगा उत्पादन
असुरक्षित नमूने मिलने वाली इकाइयों को पहले जरूरी सुधार करने होंगे। इसके बाद टेस्ट ऑफ स्कीम के तहत पांच बैचों की जांच करानी होगी। प्रत्येक बैच में 1,000 बोतलें शामिल होंगी। सभी जरूरी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही उत्पादन दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
वहीं, अधोमानक नमूने मिलने वाली इकाइयों को कमियां दूर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिए जाने का प्रावधान है। इन इकाइयों को तीन बैचों के नमूनों की जांच कराकर गुणवत्ता में सुधार साबित करना होगा।
सुधार का मौके पर होगा सत्यापन
एफएसडीए ने संबंधित अधिकारियों को प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इकाइयों में सुधार होने के बाद संबंधित मंडल के सहायक आयुक्त (खाद्य) मौके पर जाकर उसका भौतिक सत्यापन करेंगे और रिपोर्ट मुख्यालय को भेजेंगे।
निर्धारित अवसर मिलने के बावजूद सुधार नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
39 जिलों में मिले असुरक्षित नमूने
जांच के अनुसार, प्रदेश के 39 जिलों में असुरक्षित नमूने पाए गए हैं। गाजियाबाद और हापुड़ में सबसे अधिक चार-चार नमूने असुरक्षित मिले। गौतमबुद्ध नगर और अयोध्या में तीन-तीन, जबकि लखीमपुर खीरी, प्रयागराज, बरेली, बिजनौर, जौनपुर, हाथरस, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर में दो-दो नमूने असुरक्षित पाए गए। इसके अलावा लखनऊ, वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, कानपुर नगर समेत कई अन्य जिलों में भी असुरक्षित नमूने मिले हैं।
चंदौली में सबसे ज्यादा 12 नमूने अधोमानक
अधोमानक नमूनों की सूची में चंदौली सबसे ऊपर है, जहां 12 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। अयोध्या, बाराबंकी, गाजियाबाद और जौनपुर में आठ-आठ, कानपुर नगर में सात तथा आगरा और बरेली में छह-छह नमूने अधोमानक पाए गए। प्रयागराज और वाराणसी में पांच-पांच, जबकि गोरखपुर और हापुड़ में चार-चार नमूने अधोमानक मिले। अन्य जिलों में भी गुणवत्ता से जुड़ी कमियां सामने आई हैं। एफएसडीए की इस कार्रवाई का उद्देश्य पैक्ड पेयजल की गुणवत्ता पर निगरानी मजबूत करना, निर्धारित मानकों का पालन कराना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना है।