उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए चलाए जा रहे प्रयासों से संकट में फंसी महिलाओं को नई राह मिल रही है। प्रदेश में संचालित वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सुरक्षा, परामर्श, कानूनी सहायता और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। लखनऊ की तीन महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि सही समय पर मदद मिलने से मुश्किल परिस्थितियों से निकलकर आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
इनमें एक युवती ने परिवार की बंदिशों के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी की और आज प्रतिष्ठित पद पर सेवाएं दे रही है। वहीं, बचपन में शोषण का सामना करने वाली एक बालिका ने शिक्षा और प्रशिक्षण के सहारे होटल में नौकरी हासिल की। घरेलू प्रताड़ना से प्रभावित एक अन्य महिला भी अब पढ़ाई और नौकरी के जरिए अपने जीवन को नई दिशा दे रही है।
काउंसलिंग से बदली परिवार की सोच
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति के अनुसार, लखनऊ की 31 वर्षीय युवती ने वन स्टॉप सेंटर को ईमेल भेजकर बताया कि उसके परिजन उसे उच्च शिक्षा हासिल करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने से रोक रहे हैं। इस कारण परिवार में तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
मामले की जानकारी मिलने पर सेंटर की टीम युवती के घर पहुंची और परिजनों से बातचीत की। इसके बाद सुरक्षित और गोपनीय माहौल में काउंसलिंग कराई गई। टीम के प्रयासों से परिवार की सोच में बदलाव आया और युवती को पढ़ाई जारी रखने की अनुमति मिल गई। उसने अपनी शिक्षा पूरी की और आज प्रतिष्ठित पद पर काम कर रही है।
शोषण से उबरकर होटल में हासिल की नौकरी
लखनऊ की एक बालिका ने 16 वर्ष की उम्र में वन स्टॉप सेंटर पहुंचकर बचपन से हो रहे पारिवारिक शोषण की जानकारी दी। सेंटर ने उसे परामर्श और संरक्षण उपलब्ध कराया। साथ ही कानूनी कार्रवाई में भी सहयोग किया गया।
बाल कल्याण समिति के आदेश पर बालिका को राजकीय संरक्षण में रखा गया, जहां उसकी पढ़ाई जारी रही। 12वीं कक्षा पास करने के बाद उसे बेंगलुरु के इको संस्थान में होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उसने लखनऊ के एक प्रतिष्ठित होटल में नौकरी हासिल कर ली। इस तरह शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण ने उसे आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।
घरेलू प्रताड़ना से निकलकर पढ़ाई और नौकरी की राह
लखनऊ की एक अन्य 31 वर्षीय महिला ने वन स्टॉप सेंटर में शिकायत की कि उसका पति उसे बंधक बनाकर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करता है। शिकायत मिलने पर सेंटर की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित बाहर निकाला।
महिला को सेंटर में 12 दिनों तक अस्थायी आश्रय दिया गया। इस दौरान उसकी काउंसलिंग की गई। उसे विवाह से संबंधित सामान वापस दिलाने और सुरक्षित तरीके से मायके पहुंचाने में भी मदद की गई। अब महिला स्वतंत्र रूप से रह रही है और पढ़ाई के साथ नौकरी कर अपने भविष्य को बेहतर बनाने में जुटी है।
यूपी के 75 जिलों में 124 वन स्टॉप सेंटर
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 124 वन स्टॉप सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक करीब 3,18,500 मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को सहायता दी जा चुकी है।
वन स्टॉप सेंटर पर संकटग्रस्त महिलाओं को अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, काउंसलिंग, कानूनी मदद और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य हिंसा, शोषण और पारिवारिक प्रताड़ना का सामना कर रही महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना और उन्हें दोबारा आत्मनिर्भर जीवन शुरू करने में मदद करना ह