मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मुरादाबाद की पारंपरिक पीतल कला को वैश्विक पहचान दिलाने और जिले को बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से दिल्ली रोड स्थित होटल मानसरोवर पैराडाइज में ‘यूपी डायलॉग्स–मुरादाबाद चैप्टर’ का आयोजन किया गया। ‘विरासत, विकास और वैश्विक संभावनाएं’ विषय पर आयोजित इस संवाद में एमएसएमई के विकास, सुशासन, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में जिले की 1.20 लाख से अधिक और पूरे मंडल की करीब 3.44 लाख एमएसएमई इकाइयों को आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर जोर दिया गया। संवाद का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और निर्यातकों को नए अवसर उपलब्ध कराना तथा मुरादाबाद की पीतल कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाना रहा।
कार्यक्रम में संयुक्त आयुक्त उद्योग योगेश कुमार, तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के लॉ डीन प्रो. हरबंश दीक्षित, हिंदू कॉलेज की वरिष्ठ शिक्षाविद् मेजर (डॉ.) मीनू मेहरोत्रा और मीडिया सेल प्रमुख डॉ. माधव शर्मा ने अपने विचार रखे।
ओडीओपी और एमएसएमई से निर्यात को मिलेगी नई गति
संयुक्त आयुक्त उद्योग योगेश कुमार ने बताया कि मुरादाबाद से सालाना करीब 11,460 करोड़ रुपये और पूरे मंडल से लगभग 19,800 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। इन आंकड़ों को और आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय उद्योगों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि ओडीओपी वित्त पोषण सहायता योजना के तहत पात्र इकाइयों को बैंक ऋण के साथ 20 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, कारीगरों को टूलकिट, प्रशिक्षण, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और तकनीकी उन्नयन जैसी सुविधाओं से जोड़ने पर काम किया जा रहा है।
संवाद में इस बात पर जोर दिया गया कि पीतल के उत्पादों की फिनिशिंग और पैकेजिंग बेहतर बनाकर तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय कारोबार को बढ़ाया जा सकता है।
सुशासन से सुरक्षित कारोबारी माहौल पर जोर
प्रो. हरबंश दीक्षित ने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासन से छोटे उद्यमियों, कारीगरों और निर्यातकों को कारोबार के लिए बेहतर माहौल मिलता है। डिजिटल सरकारी सेवाओं और ऑनलाइन शिकायत निवारण से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिलती है।
उन्होंने अनुभवी उद्यमियों के अनुभव और युवाओं की नई सोच के बीच तालमेल बनाने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय उद्योगों को नई तकनीक और बदलती बाजार जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा सके।
‘सीएम-युवा’ योजना से 10 लाख युवाओं को स्वरोजगार का लक्ष्य
कार्यक्रम में युवाओं को रोजगार तलाशने के साथ अपना कारोबार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हुई। मेजर (डॉ.) मीनू मेहरोत्रा ने शिक्षा को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान यानी ‘सीएम-युवा’ के तहत अगले 10 वर्षों में 10 लाख युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। योजना में पांच लाख रुपये तक की परियोजनाओं के लिए ब्याज-मुक्त और बिना गारंटी ऋण के साथ 10 प्रतिशत मार्जिन मनी अनुदान का प्रावधान बताया गया।
वहीं, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत उद्योग क्षेत्र के लिए 25 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 25 प्रतिशत मार्जिन मनी की सुविधा दी जाती है। चर्चा में महिलाओं को हस्तशिल्प से जोड़ने, उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और डिजिटल बाजारों तक उनकी पहुंच मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
पीतल कला को मिलेगी वैश्विक पहचान
डॉ. माधव शर्मा ने मुरादाबाद की पारंपरिक पीतल कला को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए बेहतर ब्रांडिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रदर्शनियों और पर्यटन की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने स्थानीय कारीगरों के हुनर को आधुनिक बाजार की मांग से जोड़ने की जरूरत बताई।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीक और ई-कॉमर्स से जोड़कर कारीगरों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है। इससे स्थानीय उद्योगों को विस्तार मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।
‘यूपी डायलॉग्स–मुरादाबाद चैप्टर’ में हुई चर्चा का मुख्य उद्देश्य मुरादाबाद की औद्योगिक क्षमता, पारंपरिक विरासत और उद्यमिता को नई दिशा देना रहा। ओडीओपी, एमएसएमई सशक्तीकरण, कौशल विकास और डिजिटल बाजारों के विस्तार के जरिए पीतल नगरी को वैश्विक औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर मंथन किया गया।