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‘विंग्स ओवर गंगा’ में दिखा वायुसेना का शौर्य और सनातन संस्कृति का संगम

वाराणसी में रविवार को ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना की ताकत के साथ भारत की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिली। गंगा के ऊपर लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों ने शानदार करतब दिखाए। इस दौरान ‘ओमकार’, ‘रुद्र’, ‘भागीरथी’, ‘त्रिदेव’, ‘महादेव’, ‘विश्वनाथ’ और ‘नीलकंठ’ जैसे नामों वाले विशेष फॉर्मेशन ने लोगों का ध्यान खींचा। इन नामों के जरिए काशी की आध्यात्मिक पहचान, भगवान शिव से जुड़ी मान्यताओं और पौराणिक परंपराओं को वायुसेना के प्रदर्शन से जोड़ा गया।

भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस एयर शो में विमानों के 25 विशेष फॉर्मेशन तैयार किए गए थे। इनके नाम काशी, धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक पात्रों और पवित्र नदियों से प्रेरित थे। हर फॉर्मेशन के जरिए वायुसेना ने अपनी हवाई क्षमता, तकनीकी कौशल और सैन्य समन्वय का प्रदर्शन किया।

भगवान शिव के नाम पर दिखे लड़ाकू विमानों के करतब

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एयर शो में ‘ओमकार’ फॉर्मेशन के तहत तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और वायुसेना का ध्वज लेकर आसमान में उड़े। ‘गंगा’ फॉर्मेशन में तीन चेतक हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा की गई। भगवान शिव के स्वरूप से प्रेरित ‘रुद्र’ फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई ने उड़ान भरी, जबकि ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और अपाचे हेलीकॉप्टर हीरे के आकार में उड़ते नजर आए।

‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने एक साथ उड़ान भरकर तीनों सेनाओं के बीच समन्वय का प्रदर्शन किया। वहीं, ‘कैलाश’ में चिनूक और एएलएच हेलीकॉप्टरों ने अपनी क्षमता दिखाई।

‘महादेव’ फॉर्मेशन में हवा में ईंधन भरने वाला आईएल-78 विमान तीन मिराज-2000 विमानों के साथ शामिल हुआ। ‘विश्वनाथ’ में तीन सुखोई-30 एमकेआई, ‘पशुपति’ में चार जगुआर और ‘नीलकंठ’ में तीन राफेल विमानों ने उड़ान भरी। इन फॉर्मेशन ने काशी की धार्मिक पहचान को आधुनिक सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के साथ जोड़ा।

काशी और पौराणिक परंपराओं से जुड़े फॉर्मेशन

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एयर शो में ‘काशी’ फॉर्मेशन के तहत तीन किरण विमानों ने विजय के प्रतीक ‘वी’ आकार में उड़ान भरी और आसमान में तिरंगे के रंग बिखेरे। ‘भैरव’ फॉर्मेशन में सी-295 और डोर्नियर विमान शामिल रहे, जबकि ‘त्रिलोचन’ में एईडब्ल्यूएंडसी विमान के साथ मिग-29 ने उड़ान भरी। ‘नटराज’ फॉर्मेशन में नौसेना का पी-8आई और मिराज-2000 शामिल रहे।

‘वरुण’ फॉर्मेशन में हेलीकॉप्टरों ने रस्सी के सहारे जवानों को उतारने की क्षमता दिखाई। ‘केदार’ में राफेल, ‘हनुमान’ में सुखोई-30 एमकेआई और ‘सारनाथ’ में ऐतिहासिक हार्वर्ड विमान ने अपनी उड़ान क्षमता का प्रदर्शन किया।

इसके अलावा, ‘अलकनंदा’ फॉर्मेशन में चिनूक और एएलएच हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी। ‘दशाश्व’ फॉर्मेशन में सी-17 ग्लोबमास्टर ने सूर्यकिरण टीम के नौ हॉक विमानों का नेतृत्व किया। वहीं, स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस ने ‘अस्सी’ नाम के साथ अपनी हवाई क्षमता दिखाई।

धार्मिक प्रतीकों के जरिए दिखाई भारत की सांस्कृतिक विरासत

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इन फॉर्मेशन के नामों के पीछे काशी की धार्मिक पहचान, गंगा और हिमालय की नदियों तथा पौराणिक परंपराओं से जुड़ी मान्यताएं शामिल रहीं। ‘ओमकार’ आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है, जबकि ‘भागीरथी’ गंगा के धरती पर अवतरण की पौराणिक परंपरा की याद दिलाता है।

इसी तरह ‘त्रिदेव’ सृजन, पालन और संहार की अवधारणा को दर्शाता है। ‘नीलकंठ’ भगवान शिव के लोककल्याणकारी स्वरूप से जुड़ा है, जबकि ‘विश्वनाथ’ और ‘पशुपति’ नाम शिव की व्यापक धार्मिक परंपरा को अभिव्यक्त करते हैं। इस तरह एयर शो में आधुनिक रक्षा तकनीक के साथ भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की झलक देखने को मिली।

तेजस ने दिखाया आत्मनिर्भर भारत का सामर्थ्य

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एयर शो में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस का प्रदर्शन भी खास आकर्षण रहा। तेजस ने अपनी तेज रफ्तार, फुर्ती और शानदार हवाई करतबों से दर्शकों को रोमांचित किया। आसमान में विमान के सधे हुए मोड़ और तेजी से बदलती उड़ान ने भारतीय रक्षा तकनीक की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित किया।

तेजस भारत में विकसित रक्षा तकनीक और स्वदेशी निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसके प्रदर्शन ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की कोशिशों को रेखांकित किया। ‘विंग्स ओवर गंगा’ में तेजस समेत अन्य विमानों और हेलीकॉप्टरों के करतबों ने भारतीय वायुसेना के साहस, कौशल और आधुनिक सैन्य क्षमता की झलक पेश की।