उत्तर प्रदेश में योगी सरकार चकबंदी व्यवस्था को मजबूत करने और भूमि संबंधी पुराने मामलों के निस्तारण में तेजी लाने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में चकबंदी विभाग में पिछले आठ वर्षों के दौरान 1,544 कर्मचारियों और अधिकारियों को पदोन्नति दी गई है। चकबंदी निदेशालय के मुताबिक, पदोन्नति से जुड़ा बैकलॉग भी समाप्त कर दिया गया है।
सरकार की ओर से विभागीय मानव संसाधन को मजबूत करने के साथ गांवों में चकबंदी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए पुराने गांवों की चकबंदी को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि भूमि संबंधी मामलों का समाधान हो सके और प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बने।
10 साल से अधिक पुराने गांवों की संख्या में कमी
चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में पांच वर्ष से कम अवधि वाली श्रेणी में 2,468 गांव थे। पांच से दस वर्ष की श्रेणी में 861 और दस वर्ष से अधिक अवधि वाली श्रेणी में 1,166 गांव दर्ज किए गए थे।
वर्ष 2025 में इनकी संख्या घटकर क्रमशः 1,132, 680 और 586 रह गई। इस तरह दस वर्ष से अधिक अवधि वाली श्रेणी में गांवों की संख्या 580 कम हुई है। विभाग का कहना है कि पुराने गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सुनियोजित और समयबद्ध कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है।
आठ वर्षों में 1,544 पदोन्नतियां
चकबंदी विभाग में कर्मचारियों और अधिकारियों के करियर को गति देने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। निदेशालय के मुताबिक, वर्ष 2017 से वर्ष 2025 तक विभिन्न पदों पर कुल 1,544 पदोन्नतियां की गईं। इससे विभागीय कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिला और लंबे समय से लंबित पदोन्नति संबंधी बैकलॉग समाप्त हुआ।
लेखपाल से संयुक्त संचालक तक मिला लाभ
पदोन्नति पाने वालों में अलग-अलग स्तरों के कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं। इनमें 1,025 चकबंदी लेखपाल, 344 चकबंदीकर्ता, 97 सहायक चकबंदी अधिकारी और 64 चकबंदी अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा 11 बंदोबस्त अधिकारियों, दो उप संचालक चकबंदी और एक संयुक्त संचालक चकबंदी को भी पदोन्नति का लाभ मिला है।
योगी सरकार का जोर चकबंदी प्रक्रिया में तेजी लाने, पुराने भूमि मामलों के समाधान और विभागीय व्यवस्था को मजबूत बनाने पर है। पदोन्नति संबंधी बैकलॉग समाप्त होने और पुराने गांवों की संख्या में कमी को इसी दिशा में उठाए गए कदमों के तौर पर देखा जा रहा है।