भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने UPI की सफलता को भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में बड़े बदलाव की मिसाल बताया। राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि UPI ने 10 साल के सफर में डिजिटल भुगतान को तेज, आसान, सुरक्षित और आम लोगों के लिए सुलभ बनाया है। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल इंडिया की ताकत है, जिसमें तकनीक के जरिए लोगों को सशक्त बनाने और उनके जीवन को आसान बनाने पर जोर दिया गया है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी UPI के 10 साल पूरे होने पर इसे भारत के डिजिटल पेमेंट सफर में एक बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने लोगों से UPI के इस्तेमाल से जुड़े अपने अनुभव साझा करने की अपील की। UPI को 25 अगस्त 2016 को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निगरानी में लॉन्च किया था। इससे पहले अप्रैल 2016 में 21 बैंकों के साथ इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। दिसंबर 2016 में BHIM ऐप भी लॉन्च किया गया।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के जरिए 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गया। यानी लेनदेन की संख्या में करीब 13,000 गुना बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह, लेनदेन की कुल राशि भी 2016-17 के 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह 4,000 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी है।
भारत का UPI अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं है। इसे 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है। ग्रीस और मालदीव हाल ही में UPI को अपनाने वाले देशों में शामिल हुए हैं। UPI एक रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम है, जिसके जरिए एक ही मोबाइल ऐप से कई बैंक खातों को जोड़ा जा सकता है। इसके माध्यम से पैसे भेजने के साथ-साथ दुकानों और कारोबारियों को भुगतान भी किया जा सकता है।
लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए UPI में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाता है। UPI के विस्तार के साथ सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में भी बदलाव किए हैं। इसके तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नियम लागू किए गए हैं, जबकि उपभोक्ताओं से UPI के जरिए भुगतान करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता।