उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि जैन तीर्थंकरों की शिक्षाएं पूरी मानवता के लिए एक सार्वभौमिक संदेश हैं। उनके उपदेश आत्मानुशासन, साधना और सभी जीवों के प्रति करुणा की भावना को बढ़ावा देते हैं, जो समाज ही नहीं बल्कि समस्त सृष्टि के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
भगवान मुनिसुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि "जियो और जीने दो" का संदेश वही दे सकता है जो स्वयं सुरक्षित और आत्मानुशासित हो। उन्होंने कहा कि नकारात्मक और अनुशासनहीन शक्तियां न तो स्वयं अनुशासित रह सकती हैं और न ही दूसरों का मार्गदर्शन कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, "याद रखिए, 'जियो और जीने दो' का मंत्र वही दे सकता है जो आत्मानुशासन से बंधा हो। यह पवित्र परंपरा हम सभी को यही प्रेरणा देती है। यह केवल किसी एक समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए संदेश है।" उन्होंने कहा कि जैन तीर्थंकरों ने अपनी साधना और वचनों के माध्यम से हमेशा मानवता को सही मार्ग दिखाया है। उनके बताए रास्ते पर चलकर ही दुनिया, मानवता और सभी जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी ने लोगों से पशुओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि हम गौ संरक्षण के लिए कुछ कर सकते हैं, तो अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत की परंपरा रही है कि भोजन का पहला ग्रास गौ माता के लिए निकाला जाता है।" उन्होंने पुरानी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले लोग शाम को दीपक जलाने से पहले आटा और चीनी लेकर चींटियों को भी भोजन कराते थे। यह भावना इस बात का प्रतीक है कि सभी जीवों का इस संसार में समान अधिकार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि "जियो और जीने दो" का सिद्धांत सभी जीवों के कल्याण और सहअस्तित्व की भावना को मजबूत करता है और यही भारतीय संस्कृति तथा जैन दर्शन का मूल संदेश है।