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बेटियों के आत्मसम्मान और सुरक्षा के लिए स्कूलों में संवेदनशील माहौल तैयार करेगी योगी सरकार

योगी सरकार बालिकाओं को बेहतर शिक्षा के साथ आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व का माहौल देने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में शिक्षकों को बच्चों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को समझने और उन पर सही तरीके से बातचीत करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण में बच्चों को रूप-रंग या शरीर को लेकर चिढ़ाने, बॉडी इमेज, सोशल मीडिया के प्रभाव और लैंगिक भेदभाव जैसे मुद्दों के बारे में समझ विकसित की जा रही है। साथ ही शिक्षकों को यह भी सिखाया जा रहा है कि कक्षा में सभी बच्चों के साथ संवेदनशील और समान व्यवहार कैसे किया जाए।

विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के तहत मीना मंच और सेल्फ-एस्टीम परियोजना के लिए दो बैच में 100 प्रतिभागियों का दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इस पूरी पहल के तहत कुल 450 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की भावनाओं और समस्याओं को समझने के साथ-साथ उनके साथ बेहतर संवाद के लिए तैयार करना है। इससे स्कूलों में सुरक्षित, सम्मानजनक और बच्चों के लिए बेहतर माहौल बनाने में मदद मिलेगी।

प्रशिक्षण में चार नई कॉमिक पुस्तकों को शिक्षण सामग्री के रूप में शामिल किया गया है। इनके जरिए बच्चों को रूप-रंग और शारीरिक बनावट के कारण चिढ़ाने, अपने शरीर को लेकर सोच, शरीर की क्षमताओं और सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे विषयों को समझाने के तरीके बताए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों की स्कूल में नियमित उपस्थिति, पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा होगी।

प्रशिक्षण में मीना मंच, ‘पॉवर एंजिल’ की भूमिका और बच्चों के साथ बातचीत करने के तरीकों पर भी जानकारी दी जा रही है। शिक्षकों को सिखाया जा रहा है कि बच्चों की बात बिना किसी पूर्वधारणा के सुनी जाए और हर बच्चे की बात को महत्व दिया जाए। लैंगिक रूढ़ियों और भेदभाव को पहचानने के साथ ही कॉमिक्स और कक्षा की गतिविधियों के जरिए इन विषयों पर बच्चों से बातचीत करने का अभ्यास भी कराया जा रहा है।

प्रशिक्षण के पहले दिन पॉक्सो अधिनियम (लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून) के बारे में जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियमों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। मॉक गतिविधियों और रचनात्मक अभ्यास के जरिए शिक्षकों के बच्चों के साथ संवाद करने के कौशल को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। बच्चों और शिक्षकों के अनुभवों को रिकॉर्ड करने और उन्हें सामने लाने की प्रक्रिया पर भी काम होगा।

प्रशिक्षण के दूसरे दिन संशोधित ‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल के चार नए अध्यायों, 13 सत्रों और शिक्षक गाइड के बारे में जानकारी दी जाएगी। समूह गतिविधियों और मॉक सेशन के जरिए शिक्षकों को इन विषयों को किशोर-किशोरियों की रोजमर्रा की जिंदगी और पढ़ाई से जोड़कर समझाने का अभ्यास कराया जाएगा। इसके अलावा ‘अरमान’ मॉड्यूल और अभिभावक सत्रों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

प्रशिक्षण में मासिक धर्म के दौरान बालिकाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और स्कूल की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा होगी। इसमें साफ और सुरक्षित शौचालय, पानी, जरूरी सैनिटरी उत्पाद, उनके सही निस्तारण, गोपनीयता और जागरूकता जैसे मुद्दों पर स्कूल स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी जाएगी।

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मसम्मान, सुरक्षा और नेतृत्व का माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रूप-रंग, शारीरिक बनावट, सोशल मीडिया और लैंगिक रूढ़ियों जैसे विषयों को समझना शिक्षकों के लिए जरूरी है। मीना मंच के जरिए शिक्षकों को तैयार करने से स्कूलों में बच्चों के साथ बेहतर और संवेदनशील संवाद मजबूत होगा।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि बच्चों के आत्मसम्मान और सुरक्षित माहौल के लिए शिक्षकों का संवेदनशील होना बहुत जरूरी है। प्रशिक्षण में बॉडी इमेज, सोशल मीडिया, लैंगिक रूढ़ियों, बाल सुरक्षा और मासिक धर्म स्वास्थ्य जैसे विषयों को व्यावहारिक गतिविधियों के जरिए समझाया जा रहा है। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से यह जानकारी आगे स्कूल स्तर तक पहुंचाई जाएगी।