तमिलनाडु में सोमवार को नई शिक्षा नीति और कथित रूप से केंद्र सरकार के पैसे रोकने के खिलाफ प्रदर्शन हुए। उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा, "हम बांटने की राजनीति नहीं कर रहे हैं। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति हम पर लाद रही है। हम हमेशा से तीन भाषाओं की नीति के खिलाफ रहे हैं। दो भाषा की नीति सही थी। कृपया हम पर तीन भाषाओं की नीत न लादें।"
इस मुद्दे पर छात्रों ने प्रदर्शन किए और शास्त्री भवन में घुसने की कोशिश की। वे केंद्र सरकार से धन देने और नई शिक्षा नीति वापस लेने की मांग कर रहे थे। एआईएसएफ नेता अरविंदसामी ने कहा, "केंद्र सरकार ने करीब 12,000 करोड़ रुपया रोक दिया है। इससे तमिलनाडु में छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जब तक तमिलनाडु पीएम श्री योजना लागू नहीं करता, उसे पैसे नहीं मिलेंगे। हम इसकी निंदा करते हैं।"
डीएमके प्रवक्ता टी. के. एस. इलांगोवन ने पीटीआई वीडियो से कहा, "ये ब्लैकमेल है। केंद्र सरकार राज्यों को ब्लैकमेल नहीं कर सकती। ये अपराध है। वे ब्लैकमेल कर रहे हैं। मेरा सवाल है कि क्या वे उत्तर प्रदेश, बिहार या राजस्थान में तीन भाषा नीति लागू कर सकते हैं? वहां तीसरी भाषा क्या होगी? वहां सिर्फ हिंदी पढ़ाई जाती है, अंग्रेजी भी नहीं। लोकतंत्र में बहुमत को माना जाता है। वे लोगों पर कुछ भी कैसे लाद सकते हैं?"
केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन ने कहा, "मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन राजनैतिक वजहों से लोगों को गलत जानकारी दे रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने पीएम श्री योजना पर साफ कहा है कि पहले तमिलनाडु ने समझौते पर दस्तखत किए, बाद में पीछे हट गया। जब वे राज्यों को पैसे देते हैं तो कुछ शर्तें रखते हैं। पीएम श्री योजना में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए पूरे आर्थिक सहयोग का भरोसा दिया है। हम 1965 के दौर में नहीं जी रहे, जब उन्होंने भाषा को लेकर राजनीति की थी। लोग अब प्रगतिशील व्यवस्था चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीएमके के मुकाबले तमिलनाडु में अच्छा काम किया है।"
इस मुद्दे पर एआएडीएमके प्रवक्ता कोवई सत्यन का कहना था, "ये वही एम. के. स्टालिन सरकार है, जिसने केंद्र सरकार को लिखा था कि वे पीएम श्री के तहत नई शिक्षा नीति पर आधारित मॉडल स्कूल योजना लागू करने में मदद देंगे। ये पीएम श्री स्कूल क्या हैं? ये नई शिक्षा नीति के तहत मॉडल स्कूल हैं। जब आप तमिलनाडु में पीएम श्री स्कूल खोलने पर सहमत हो गए तो अब पीछे क्यों हट रहे हैं? ये दोहरा रवैया क्यों? एआईएडीएमके बिल्कुल साफ है कि हम दो भाषा नीति को समर्थन देंगे। कोई हिंदी सीखना चाहे तो हम उसके खिलाफ नहीं हैं। हम इसे लादने के खिलाफ हैं। लेकिन डीएमके दोहरा रवैया अपना रहा है।"
मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था। उनके मुताबिक केंद्रीय मंत्री ने तब तक पैसे देने से इंकार किया था, जब तक तमिलनाडु नई शिक्षा नीति और तीन भाषा नीति स्वीकार नहीं कर लेता है।
स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान का 15 फरवरी को वाराणसी का वीडियो क्लिप टैग किया, जिसमें वे पत्रकारों से कह रहे थे कि तमिलनाडु को भारतीय संविधान के अनुरूप तीन भाषा नीति को स्वीकार करना होगा। स्टालिन ने इसे ये कहते हुए अस्वीकार कर दिया है कि तमिलनाडु की जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। राज्य को केंद्र से मिलने वाले धन का इंतजार है।