Kerala: ईशा फाउंडेशन द्वारा ध्यान को सबके लिए सुलभ बनाने के निरंतर प्रयास के तहत “मिरेकल ऑफ माइंड” मेडिटेशन अनुभव सत्र का आयोजन राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण संस्थान (NISH) में बधिर और कम सुनने वाले विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के लिए किया गया। सद्गुरु द्वारा लॉन्च किया गया मिरेकल ऑफ माइंड एक हमेशा के लिए निःशुल्क 7-मिनट का मेडिटेशन ऐप है, जो व्यक्ति को अपने भीतर की भलाई और मानसिक संतुलन का नियंत्रण स्वयं लेने में सक्षम बनाता है।
इस पहल को ईशा वॉलंटियर्स, NISH, और पैरालंपिक राइफल शूटर सिद्धार्थ बाबू ने मिलकर आगे बढ़ाया। उन्होंने मिलकर इस मेडिटेशन को बधिर और कम सुनने वाले समुदाय के लिए अनुकूल बनाने पर कार्य किया ताकि प्रतिभागी न केवल सत्र के दौरान इसे अनुभव कर सकें बल्कि घर पर भी स्वतंत्र रूप से इसका अभ्यास जारी रख सकें।
शुरुआत में टीम ने प्रकाश आधारित विधि (light-based method) का प्रयोग किया, जिसमें ध्यान के निर्देशों को दर्शाने के लिए रोशनी की तीव्रता को बढ़ाया और घटाया जाता था। लेकिन घर पर अभ्यास के लिए यह तरीका व्यावहारिक नहीं रहा। इसके बाद, NISH के क्रिएटिव मीडिया एडिटर अरविंद और बधिर समुदाय के साथ कार्य करने में अनुभवी अस्वथी ने मिलकर ध्यान के निर्देशों को वाइब्रेशन पैटर्न्स में कोड किया। इससे प्रतिभागी अपने मोबाइल उपकरणों पर कहीं भी, कभी भी इस ध्यान का अनुभव कर सकते हैं।
अनुभव साझा करते हुए, पिशोन, जो NISH के पूर्व छात्र और वर्तमान में स्टाफ सदस्य हैं, ने कहा, “यह ध्यान अनुभव अत्यंत शांतिदायक था। सबसे खास बात यह थी कि आयोजकों ने बधिर विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए कक्षा को सुलभ बनाने की पहल की। मुझे विश्वास है कि ऐसे प्रयास एक अधिक समावेशी और दयालु समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। मैं भविष्य के सत्रों में भाग लेने और योग व ध्यान के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव को अनुभव करने के लिए उत्सुक हूँ।”
सत्र के दौरान भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) में अनुवादित वीडियो चलाए गए, जो प्रतिभागियों को ध्यान प्रक्रिया में मार्गदर्शन देते थे। छात्रों को पहले प्रत्येक वाइब्रेशन पैटर्न का अर्थ समझाया गया और फिर एक वाइब्रेशन आधारित मेडिटेशन फ़ाइल साझा की गई, जिससे वे सत्र में भाग ले सकें और घर पर भी अभ्यास जारी रख सकें।
म्यूसीना, जो NISH में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स की छात्रा हैं, ने कहा, “यह ध्यान बहुत प्रभावशाली था। मैंने पहले भी योग सत्रों में भाग लिया है, लेकिन वे उतने असरदार नहीं थे क्योंकि मुझे निर्देशों को समझने के लिए बार-बार आँखें खोलनी पड़ती थीं। लेकिन यहाँ वाइब्रेशन के माध्यम से मैं आँखें बंद रखकर निर्देशों का पालन कर सकी। इससे मेरा मन बहुत शांत हुआ। साथ ही यह बहुत छोटा है और मैं इसे कहीं भी कर सकती हूँ।”
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा इसके मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव की पुष्टि की गई है। दुनियाभर में लाखों लोग इस मेडिटेशन के माध्यम से तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का अनुभव कर रहे हैं। अब तक इस ऐप को एंड्रॉयड और iOS पर 2.3 मिलियन से अधिक डाउनलोड्स प्राप्त हो चुके हैं, और इसका रेटिंग Play Store पर 4.8 तथा App Store पर 4.9 है।
हालांकि ऐप स्वयं अभी तक बधिर और कम सुनने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह सुलभ नहीं है, यह पहल मिरेकल ऑफ माइंड को इस समुदाय के लिए समावेशी बनाने की दिशा में पहला कदम है — जो भविष्य में और अधिक सुलभ ध्यान अनुभवों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।