Washington (DC): अमेरिका के ह्यूस्टन मेथोडिस्ट के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण खोज की है, जिसमें पाया गया है कि TDP43 नामक प्रोटीन, जो अब तक डिमेंशिया और एएलएस (ALS) जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से जुड़ा माना जाता था, वह डीएनए रिपेयर की एक अहम प्रक्रिया को भी नियंत्रित करता है।
यह डीएनए मरम्मत प्रणाली, जिसे डीएनए मिसमैच रिपेयर कहा जाता है, कोशिकाओं में जेनेटिक मटेरियल कॉपी होने के दौरान होने वाली गलतियों को ठीक करती है।
शोध के अनुसार, जब TDP43 प्रोटीन का स्तर बहुत ज्यादा या बहुत कम हो जाता है, तो डीएनए रिपेयर से जुड़े जीन अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं। इससे कोशिकाओं को फायदा होने के बजाय नुकसान पहुंचता है, जिससे न्यूरॉन्स को क्षति और जीनोम अस्थिरता बढ़ सकती है। यही स्थिति कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकती है।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Nucleic Acids Research में प्रकाशित हुआ है। शोध के प्रमुख वैज्ञानिक मुरलीधर एल. हेगड़े के अनुसार, TDP43 सिर्फ एक RNA-बाइंडिंग प्रोटीन नहीं है, बल्कि यह डीएनए रिपेयर सिस्टम का एक महत्वपूर्ण नियंत्रक भी है।
शोध में यह भी सामने आया कि कैंसर के मामलों में TDP43 की मात्रा अधिक पाई गई और यह ट्यूमर में ज्यादा म्यूटेशन से जुड़ी हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह प्रोटीन न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों और कैंसर—दोनों के बीच एक अहम कड़ी बन सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं। प्रयोगशाला में जब TDP43 के कारण बढ़ी हुई डीएनए रिपेयर गतिविधि को नियंत्रित किया गया, तो कोशिकाओं में हुए नुकसान को आंशिक रूप से ठीक किया जा सका।
विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में डीएनए मिसमैच रिपेयर को नियंत्रित करना एक प्रभावी उपचार रणनीति बन सकता है।