Breaking News

इजराइली एयर फोर्स के हमले से दक्षिणी लेबनान के अल-शहाबिया शहर में भारी तबाही     |   ‘राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने पर नीतीश कुमार को बधाई’, PM मोदी का X पोस्ट     |   बंगाल चुनाव: ‘सभी एजेंसियां बिकी हुई हैं, बीजेपी पर भरोसा मत कीजिए- ममता बनर्जी     |   बंगाल चुनाव: ‘गर्भवती महिलाओं को 21 हजार रुपये की मदद दी जाएगी’, बोले अमित शाह     |   बंगाल चुनाव: ‘महिलाओं को नौकरी में 33 फीसदी आरक्षण’, कोलकाता में बोले अमित शाह     |  

हजरतबल दरगाह में राष्ट्रीय प्रतीक विवाद पर उमर-महबूबा ने वक्फ बोर्ड पर साधा निशाना, उठी ये मांग

श्रीनगर: हजरतबल दरगाह में राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ की नक्काशी वाली पट्टिका को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने घटना के लिए उपद्रवियों के बजाय वक्फ बोर्ड की आलोचना की है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों पर राष्ट्रीय प्रतीकों का उपयोग उचित नहीं है और इससे लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

यह विवाद दरगाह के हाल ही में हुए जीर्णोद्धार के दौरान लगी नई पट्टिका से शुरू हुआ। कुछ लोगों ने अशोक स्तंभ को मूर्ति जैसा मानते हुए इसे इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ बताया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया।

उमर अब्दुल्ला क्या बोले?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर प्रतीकों का उपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष दरख़्शां अंद्राबी की आलोचना करते हुए कहा कि यदि जीर्णोद्धार में उनकी भूमिका थी तो इसका श्रेय लेने के लिए पट्टिका लगाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा, “धार्मिक स्थलों पर किसी भी प्रकार का प्रतीक नहीं होना चाहिए। दरगाह शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने बनवाई थी, परंतु उन्होंने कभी पट्टिका नहीं लगाई। काम स्वयं अपनी पहचान बनाता है।”

महबूबा मुफ़्ती का विरोध
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने इसे इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा कि दरगाह में शिर्क (मूर्तिपूजा) की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “यह धार्मिक स्थल है, कोई राजनीतिक मंच नहीं। इस तरह का बोर्ड इस्लाम के खिलाफ है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ईशनिंदा कानून के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।”

वक्फ बोर्ड की प्रतिक्रिया
वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष दरख़्शां अंद्राबी ने राष्ट्रीय प्रतीक से छेड़छाड़ की कड़ी निंदा की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत कार्रवाई की मांग की और कहा कि यह भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान है। साथ ही, उन्होंने इसे संविधान पर हमला करार दिया।

भाजपा की प्रतिक्रिया और रैली
भाजपा ने कश्मीर में पहली बार मिलाद रैली निकालकर सबके साथ विकास का संदेश दिया। भाजपा नेता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि यह रैली सामाजिक एकता का संकेत है और प्रतीक पर हमला करना आतंकवादी कृत्य है। उन्होंने कहा कि मुसलमान जहाँ भी नमाज़ पढ़ते हैं, वहाँ प्रतीक चिन्ह नहीं रखते, लेकिन इस घटना ने संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों पर आघात पहुँचाया है।

पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद दरगाह परिसर में पुलिस और सीआरपीएफ की भारी तैनाती की गई। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

दरगाह में शांति का माहौल
आज दरगाह में लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से नमाज़ अदा की। स्थानीय लोगों ने कहा कि धार्मिक स्थल में किसी भी तरह की हिंसा का कोई स्थान नहीं है और विरोध व्यक्त करने के लिए सही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। उन्होंने अधिकारियों से भी अपील की कि मामले में संयम बरता जाए।

इस घटना ने धार्मिक, राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर व्यापक बहस को जन्म दिया है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन, राजनीतिक दल और धार्मिक संगठन मिलकर कैसे शांति और आपसी समझ को बढ़ावा देते हैं।