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गुजरात में प्राकृतिक खेती का नया आयाम, खजूर की खेती से किसानों की आर्थिक उन्नति

Gujarat: खरेक यानी सूखा खजूर, सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। अब यही खजूर गुजरात के किसानों के लिए आर्थिक उन्नति का प्रतीक भी बन गया है। अमरेली के संजयभाई सुदाणी, जो पहले पारंपरिक खेती करते थे, 2019 से उन्होंने गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाया। संजय ने 7 बीघा ज़मीन में बराही खरेक के 130 पौधे लगाए थे, जिनमें 125 मादा और 5 नर पौधे थे। जिसके लिए उन्हें गुजरात सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत पौधों के लिए 1,56,250 रुपये की सहायता भी मिली है। जिससे सालाना  उन्हें दो लाख का  मुनाफा होता है।

खेतों में तैयार खजूर के फल की पैकिंग से लेकर उसे बाज़ार तक ले जाने में उनका पूरा परिवार शामिल होता है। खजूर की खेती के लिए वो खुद गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और पानी के मिश्रण से जीवामृत तैयार करते हैं। जिससे खेती की उर्वरता भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है। 

खजूर के इन खेतों में हर 30 दिन में जीवामृत डाला जाता है, जिससे खारेक का उत्पादन भी बढ़ रहा है। साथ ही ऑर्गैनिक फसलों की बाज़ार में मांग बढ़ने से आय मे भी वृद्धि हो रही है। संजयभाई, इस इलाके में दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं।