म्यांमार की सेना जुंटा ने 2021 में हुए तख्तापलट के बाद लगाए गए आपातकाल को खत्म कर दिया है, जिसमें आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। इस कदम से दिसंबर में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों का रास्ता साफ हो गया है। इन चुनावों का विपक्षी समूहों ने बहिष्कार करने की कसम खाई है।
आपातकालीन कानून के तहत पूर्ण शक्ति रखने वाले जुंटा प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग ने चुनाव की समय-सीमा की पुष्टि की, लेकिन कहा कि सुरक्षा चिंताओं के कारण इसे चरणों में आयोजित किया जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि इस मतदान का मकसद सैन्य शासन को वैध बनाना है, न कि लोकतंत्र बहाल करना।
सू की अभी भी जेल में हैं और हाल ही में हुई जनगणना में 1.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए, जिससे चुनाव की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा हो रहा। जुंटा ने नए शासी निकायों की घोषणा की है और एक कानून पारित किया है जिसमें मतदान के खिलाफ भाषण देने पर 10 साल की जेल का प्रावधान है।
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि वही सैन्य नेता नियंत्रण बनाए रखेंगे, जबकि विद्रोही समूह विरोध प्रदर्शन के रूप में हमले तेज कर सकते हैं। चुनाव की तारीख का ऐलान होना अभी बाकी है।