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कोयंबटूर कार बम धमाके से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 3 राज्यों में 16 ठिकानों पर छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को 2022 में हुए कोयंबटूर बम धमाके से जुड़े टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र और तेलंगाना में कुल 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। ED की यह कार्रवाई गुरुवार सुबह से जारी है। चेन्नई जोनल कार्यालय की टीमों ने तमिलनाडु के चेन्नई और कोयंबटूर, तेलंगाना के हैदराबाद और महाराष्ट्र के मुंबई में संदिग्धों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली। ये सभी स्थान मामले में संदिग्ध आरोपियों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

ED ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से दर्ज विभिन्न FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। यह मामला अक्टूबर 2022 में कोयंबटूर के संगमेश्वर मंदिर के पास हुए आत्मघाती कार बम विस्फोट से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह ISIS से प्रेरित आतंकी हमला था, जिसे आत्मघाती हमलावर जेम्शा मुबीन और उसके सहयोगियों ने विस्फोटक से भरी एक मॉडिफाइड मारुति कार के जरिए अंजाम दिया था।

जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने के दो प्रमुख तरीके अपनाए थे। पहला, कोविड-19 महामारी के दौरान फर्जी वैक्सीन सर्टिफिकेट बनाने का रैकेट चलाया गया, जिसके जरिए बिना टीका लगवाए प्रमाणपत्र चाहने वाले लोगों से पैसे लिए गए। दूसरा, कोवई अरबी कॉलेज में चंदे और कथित फर्जी निवेश के जरिए धन जुटाया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह संस्थान युवाओं के कथित कट्टरपंथीकरण से भी जुड़ा था।

जांच में सामने आया कि बम धमाके के मामले में आरोपी 12 लोगों ने कोवई अरबी कॉलेज में ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से कक्षाओं में हिस्सा लिया था। अधिकारियों के मुताबिक, कॉलेज के प्रमोटर जमील बाशा ने उन्हें कथित तौर पर प्रभावित किया, जिसके बाद वे सलाफी-जिहादी विचारधारा से प्रभावित हुए और प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के समर्थन में हमले की साजिश रची।

अप्रैल 2025 में NIA ने ISIS से प्रेरित कोयंबटूर कार बम विस्फोट मामले में पांच और आरोपियों के खिलाफ चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें शेख हिदायतुल्लाह, उमर फारूक, पवास रहमान, शरण मरियप्पन और अबू हनीफा शामिल हैं। NIA के मुताबिक, इन पर आतंकी फंडिंग और हमले से जुड़ी अन्य गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। इस चार्जशीट के बाद मामले में कुल 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी थी।

NIA की जांच के अनुसार, शेख हिदायतुल्लाह और हमले के कथित अमीर उमर फारूक ने 2021-22 के दौरान फर्जी कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट का रैकेट चलाया था। इस रैकेट से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर विस्फोटक और कार बम हमले के लिए अन्य संसाधन खरीदने में किया गया। जांच के मुताबिक, पवास रहमान और शरण ने इस रैकेट में मदद की, जबकि अबू हनीफा ने फर्जी प्रमाणपत्र बनाने के लिए धन उपलब्ध कराया।

NIA के मुताबिक, जेम्शा मुबीन ने एक मॉडिफाइड मारुति कार में वाहन-जनित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) का इस्तेमाल कर आत्मघाती विस्फोट किया था। इस घटना में उसकी मौत हो गई थी, जिसके चलते उसके खिलाफ आरोप समाप्त कर दिए गए। जांच एजेंसी ने कहा है कि मुबीन ने ISIS के स्वयंभू खलीफा अबू-अल-हसन अल-हाशिमी अल-कुरैशी के प्रति निष्ठा जताई थी और अपनी चरमपंथी विचारधारा के तहत गैर-विश्वासियों को निशाना बनाने का लक्ष्य रखा था।

NIA की जांच में यह भी सामने आया कि हमले से पहले आरोपियों ने साजिश रचने के लिए विय्यूर हाई-सिक्योरिटी जेल और सत्यमंगलम रिजर्व फॉरेस्ट में बैठकें की थीं। जांच एजेंसी के अनुसार, उनका उद्देश्य अपने नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन की गिरफ्तारी का बदला लेना था। अजहरुद्दीन को 2019 में हिंसक सलाफी-जिहादी विचारधारा को बढ़ावा देने के आरोप में NIA ने कोयंबटूर से गिरफ्तार किया था।