प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फर्जी GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। ED की जांच में 135 ऐसी शेल कंपनियों का नेटवर्क सामने आया है, जो कागजों पर मौजूद थीं और इनके जरिए बिना किसी सामान या सेवा की वास्तविक आपूर्ति के 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी बिल जारी किए गए।
ED के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए 734 करोड़ रुपये से ज्यादा का फर्जी ITC तैयार कर अलग-अलग लाभार्थी कंपनियों को दिया गया। इन कंपनियों ने कमीशन देकर इस फर्जी ITC का इस्तेमाल अपनी GST देनदारी कम करने के लिए किया।
दो आरोपी गिरफ्तार
ED के रांची जोनल ऑफिस ने ज्ञान चंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और राज जायसवाल को गिरफ्तार किया है। दोनों को 30 सितंबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 19 के तहत तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 1 अक्टूबर को दोनों को रांची की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जमशेदपुर और कोलकाता में तलाशी
ED ने बताया कि 30 सितंबर को जमशेदपुर, झारखंड और कोलकाता, पश्चिम बंगाल में ज्ञान चंद जायसवाल, CA संजय पारेख और अन्य से जुड़े आवासीय और कार्यालय परिसरों समेत चार ठिकानों पर तलाशी ली गई। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद कर जब्त किए गए।
ED के अनुसार, ज्ञान चंद जायसवाल और राज जायसवाल का समूह फर्जी ITC से जुड़े इस कथित फ्रॉड का प्रमुख लाभार्थी था। एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर कई कंपनियां बनाई थीं। इनमें Maa Sharda Endeavours Pvt Ltd, Makers Casting Pvt Ltd और Kedarnath Trexim Pvt Ltd शामिल हैं। इसके अलावा कर्मचारियों के नाम पर भी Jai Bhole Enterprises जैसी संस्थाएं बनाई गईं।
54.33 करोड़ रुपये का फर्जी ITC
ED ने कहा कि जांच में सामने आया कि इन कंपनियों के जरिए 54.33 करोड़ रुपये का फर्जी ITC रूट किया गया। एजेंसी के मुताबिक, यह रकम बाद में आरोपियों और उनके रिश्तेदारों के व्यक्तिगत बैंक खातों और संबंधित संस्थाओं के खातों में पहुंचाई गई। ED का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल कारोबारी गतिविधियों और चल-अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
ED ने बताया कि इस मामले में मई 2025 और अगस्त 2025 में भी कोलकाता, जमशेदपुर, रांची और अन्य जगहों पर आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई थी। उस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, नकदी और करीब 70 लाख रुपये की बैंक राशि फ्रीज की गई थी।
एजेंसी ने 20 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों से जुड़े दो प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) भी जारी किए हैं। इस मामले में 8 मई 2025 को PMLA के तहत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से तीन आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ED ने विशेष PMLA अदालत, रांची में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है और मामला फिलहाल ट्रायल स्टेज में है।