Breaking News

BRICS 2026 कारकेड रिहर्सल को लेकर दिल्ली में ट्रैफिक एडवाइजरी जारी     |   मुंबई में महंगाई का डबल अटैक... महंगी हुई CNG-PNG, ऑटो और काली-पीली टैक्सी का किराया भी बढ़ा     |   हिमाचल: नालागढ़ पुलिस स्टेशन IED ब्लास्ट केस में 3 और गिरफ्तार, NIA के शिकंजे में अब 6 आरोपी     |   यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूसी एयर स्ट्राइक, 3 की मौत; 5 घायल     |   होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर पर हमला, 3 अज्ञात प्रोजेक्टाइल से टकराने की खबर     |  

माघ मेले 2026 में सेवा का महायज्ञ हर घंटे 2000 रोटियां, हजारों श्रद्धालुओं का भरा जा रहा पेट

Uttar Pradesh: माघ मेले 2026 में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रयागराज में बड़े स्तर पर सामुदायिक रसोइयां संचालित की जा रही हैं। इन रसोइयों के ज़रिये रोज़ाना हजारों नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं को मुफ्त और सादा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मेले में बने इन भोजन वितरण केंद्रों को ‘अन्न क्षेत्र’कहा जाता है। खुले मैदानों में स्थापित इन अन्न क्षेत्रों में आधुनिक मशीनों की मदद से भोजन तैयार किया जा रहा है, ताकि किसी भी श्रद्धालु को भूखा न रहना पड़े।

रसोई में लगी विशेष मशीनें एक घंटे में 2,000 रोटियां बनाने की क्षमता रखती हैं। एक साथ दो मशीनें चलने पर यह संख्या 4,000 रोटियां प्रति घंटा तक पहुंच जाती है। आयोजकों के अनुसार, मशीनें जितनी देर चलेंगी, उसी हिसाब से भोजन की मात्रा बढ़ाई जाती है।

अन्न क्षेत्र के संस्थापक पंडित रोहित शर्मा के अनुसार, सरकार की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए पहले से पूरी तैयारी की गई है। आधुनिक मशीनरी की वजह से कम समय में ज्यादा लोगों को भोजन कराया जा रहा है।

वहीं, तीर्थ पुरोहित प्रयागवाल समाज के अध्यक्ष अमित राजवैद्य ने बताया कि रोज़ाना लगभग 5,000 श्रद्धालुओं को भोजन कराया जा रहा है। मौनी अमावस्या जैसे प्रमुख स्नान पर्वों पर यदि 50,000 श्रद्धालु भी आएं, तो उनके लिए भी पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है।

हर भंडारे में प्रतिदिन 5,000 से 10,000 लोगों को भोजन कराया जा रहा है। तेज़ गति से बनती रोटियों और सुव्यवस्थित सेवा के चलते लंबी कतारों के बावजूद किसी श्रद्धालु को भूखा नहीं लौटना पड़ता।

माघ मेले 2026 में यह सामुदायिक रसोई न केवल भोजन का इंतजाम है, बल्कि सेवा और समर्पण की एक मिसाल भी बन चुकी है।