ओडिशा के पुरी में 16 जुलाई को होने वाली भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। बुधवार को पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद तीनों पवित्र रथों को रथखला से जगन्नाथ मंदिर के मुख्य द्वार तक लाया जाएगा। भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष, बलभद्र का तालध्वज और देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ 'आज्ञामाला बीजे' अनुष्ठान के बाद मंदिर के सामने स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही रथ यात्रा की अंतिम तैयारियां पूरी हो जाएंगी।
रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए मंगलवार को पुरी में एनडीआरएफ (NDRF), ओडिशा फायर सर्विस, स्काउट्स एंड गाइड्स और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल की। इसमें भीड़ प्रबंधन, आपदा से निपटने और आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों का अभ्यास किया गया।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी रथ यात्रा को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। इस्कॉन (ISKCON) के लीगल हेड और कम्युनिकेशंस डायरेक्टर अनंत भगवान दास ने बताया कि इस बार तिरुपति बालाजी की प्रतिकृति मुख्य आकर्षण होगी। उन्होंने बताया कि रथ यात्रा के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, आध्यात्मिक प्रवचन और भगवद्गीता पर विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से इस आयोजन में शामिल होने की अपील की।
गुजरात में भी रथ यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है। उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने मंगलवार को रथ यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ बैठक कर संवेदनशील इलाकों, कानून-व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल इस यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसी वजह से ओडिशा सहित कई राज्यों में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं।