बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने साफ कर दिया है कि वे विशेष राज्य का दर्जा जैसी अपनी मांगों पर कायम रहेगी।
जेडीयू के प्रमुख बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग लंबे समय से करते रहे हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली बिहार कैबिनेट ने पिछले साल प्रस्ताव पारित कर केंद्र से राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग की थी।
तत्कालीन बिहार सरकार की ओर से राज्य में किए गए जाति सर्वेक्षण के आधार पर ये मांग की गई थी। हालांकि केंद्र सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे 14वें वित्त आयोग की सिफारिश के मद्देनजर किसी भी राज्य से विशेष श्रेणी का दर्जा की मांग पर विचार नहीं करेगी।
जेडीयू के वरिष्ठ नेता और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को मीडिया से कहा था, "जेडीयू एनडीए का हिस्सा है और इसमें बना रहेगा। लेकिन बिहार की वित्तीय स्थिति और अर्थव्यवस्था से जुड़ी कुछ मांगें हैं जिनपर केंद्र को ध्यान देने की जरूरत है।"
विजय कुमार चौधरी ने कहा था, "बिहार अपने वित्त का प्रबंधन खुद कर रहा है। हम देश के सबसे गरीब राज्यों में से हैं। हम बिहार के लिए विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज की अपनी मांग पर कायम हैं।"
उन्होंने कहा "बिहार सरकार 2011-12 से राज्य के लिए विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग कर रही है। इससे पहले प्रस्ताव इस संबंध में बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में पारित किया गया था। बिहार के विकास के लिए विशेष पैकेज/विशेष सहायता की जरूरत है। बिहार सबसे योग्य राज्य है जिसे केंद्र से विशेष वित्तीय सहायता की जरूरत है।"