भारतीय रेलवे ने उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल के बाकी बचे 712 रूट किलोमीटर (RKM) पर कवच वर्जन 4.0 लगाने को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर कुल 170 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। स्वदेशी Automatic Train Protection (ATP) सिस्टम की तैनाती से इस रेल मंडल में ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। रेल मंत्रालय के मुताबिक, कवच 4.0 के लागू होने से चिन्हित रेलखंडों पर ट्रेन संचालन को सुरक्षा की एक अतिरिक्त और आधुनिक परत मिलेगी। भारतीय रेलवे लगातार अपने नेटवर्क में कवच का विस्तार कर रहा है, ताकि सिग्नलिंग और ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाया जा सके।
कवच भारत में विकसित स्वदेशी Automatic Train Protection (ATP) सिस्टम है। इसका उद्देश्य ट्रेन संचालन के दौरान दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना है। यह सिस्टम:
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ट्रेन को खतरे वाले सिग्नल को पार करने से रोकने में मदद करता है।
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जरूरत पड़ने पर अपने आप ब्रेक लगा सकता है।
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संवेदनशील परिस्थितियों में ट्रेन की गति नियंत्रित करता है।
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ट्रेनों के बीच टक्कर की संभावना को काफी कम करता है।
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में दी गई जानकारी में बताया कि 31 जुलाई 2026 तक कवच वर्जन 4.0 को 2,633 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक चालू किया जा चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के 1,423 रूट किमी और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर के 1,210 रूट किमी शामिल हैं।सरकार ने बताया कि कवच वर्जन 4.0 को भारतीय रेलवे में बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है।
लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय रेलवे के 21,794 रूट किलोमीटर पर ट्रैकसाइड कवच लगाने का काम शुरू किया जा चुका है। इसमें गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, गोल्डन डायगोनल, हाई डेंसिटी नेटवर्क और अन्य चिन्हित रेलखंड शामिल हैं। कवच परियोजना के तहत अब तक 11,547 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल, 1,721 टेलीकॉम टावर और 1,009 स्टेशनों पर स्टेशन डेटा सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 7,726 रूट किलोमीटर पर ट्रैकसाइड उपकरण लगाए गए हैं और 6,290 लोकोमोटिव में कवच सिस्टम लगाया जा चुका है। वहीं, 7,190 और लोकोमोटिव तथा 1,200 EMU/MEMU ट्रेनों को भी कवच सिस्टम से लैस करने का काम शुरू किया गया है।
रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आवंटित 2,93,030 करोड़ रुपये के बजट में से जुलाई 2026 तक 1,14,973 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह कुल बजट आवंटन का करीब 39 फीसदी है। रेलवे का कहना है कि कवच का विस्तार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ देश के रेल नेटवर्क में आधुनिक सिग्नलिंग और ट्रेन सुरक्षा तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।