उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने तेज रफ्तार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। यातायात निदेशालय की ओर से चलाए गए ‘ऑपरेशन सेफ स्पीड’ अभियान के तहत दो चरणों में 6,777 वाहनों के चालान किए गए। इस दौरान कुल 1 करोड़ 38 लाख 32 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
डीजीपी राजीव कृष्ण की पहल पर चलाए गए इस अभियान में अपर पुलिस महानिदेशक यातायात ए. सतीश गणेश के निर्देशन में कार्रवाई की गई। प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे और चिन्हित स्थानों पर इंटरसेप्टर वाहनों के जरिए तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों की निगरानी की गई। निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।
दो चरणों में चला अभियान
‘ऑपरेशन सेफ स्पीड’ का पहला चरण 26 अक्टूबर और दूसरा चरण 28 अक्टूबर 2026 को चलाया गया। दोनों चरणों में प्रदेश के विभिन्न एक्सप्रेसवे और हाईवे पर विशेष जांच की गई। यमुना एक्सप्रेसवे पर सबसे अधिक 3,116 वाहनों के चालान किए गए और 66 लाख 98 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
अन्य प्रमुख मार्गों पर कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: 1,289 चालान, 24 लाख 18 हजार रुपये का जुर्माना।
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गंगा एक्सप्रेसवे: 553 चालान, 9 लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना।
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लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे: 537 चालान, 11 लाख 82 हजार 500 रुपये का जुर्माना।
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे: 497 चालान, 9 लाख 94 हजार रुपये का जुर्माना।
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पूर्वांचल एक्सप्रेसवे: 348 चालान, 6 लाख 96 हजार रुपये का जुर्माना।
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ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे: 214 चालान, 4 लाख 28 हजार रुपये का जुर्माना।
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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे: 103 चालान, 2 लाख 28 हजार रुपये का जुर्माना।
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गोरखपुर-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे: 90 चालान, 1 लाख 88 हजार रुपये का जुर्माना।
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कानपुर-वाराणसी हाईवे: 30 चालान, 60 हजार रुपये का जुर्माना।
तेज रफ्तार पर अंकुश लगाना लक्ष्य
यातायात निदेशालय के मुताबिक, तेज गति से वाहन चलाना सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल है। अधिक रफ्तार के कारण दुर्घटना होने पर गंभीर चोट और जनहानि का खतरा बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
अभियान का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को यातायात नियमों के पालन के प्रति जागरूक करना भी है। इंटरसेप्टर वाहनों के माध्यम से निगरानी कर पुलिस यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि एक्सप्रेसवे और हाईवे पर वाहन निर्धारित गति सीमा के भीतर चलें।
सुरक्षित सफर के लिए यातायात नियमों का पालन जरूरी
योगी सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस की इस पहल के जरिए वाहन चालकों को अपनी और दूसरों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बनने का संदेश दिया जा रहा है। पुलिस का जोर है कि चालक तेज रफ्तार से बचें और निर्धारित गति सीमा का पालन करें, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को कम किया जा सके।
सुरक्षित सफर के लिए गति सीमा का पालन करना केवल कानूनी नियम नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी है।