अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों में शांति समझौता पूरा हो गया। इसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की। इस घोषणा के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में 4 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 3.95 फीसदी गिरकर 83.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 4.68 फीसदी गिरकर 80.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से तेल आपूर्ति का दबाव कम हो सकता है लेकिन सप्लाई चेन को फिर से पहले की तरह होने में कुछ समय लगेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि लंबे समय तक चली जंग के कारण रिफाइनरी और गैस फील्ड्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है। करीब 10 से 12 मिलियन बैरल प्रतिदिन का उत्पादन अभी भी सप्लाई चेन से बाहर है।
युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब थी और युद्ध के समय यह 115 डॉलर तक पहुंच गई थी। इस समझौते का क्रूड की कीमतों पर असर पड़ेगा। लेकिन युद्ध में इंफ्रास्ट्रक्चर को जो नुकसान हुआ है, उसके सही होने में लंबा समय लगेगा। ऐसे में फिर से 70 डॉलर वाली कीमत पर आने में अभी वक्त लगेगा।
भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी क्रू्ड ऑयल आयात करता है। क्रूड की कीमत में तेजी के बाद भारत ने लंबे समय तक अपने यहां पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी नहीं की थी। लेकिन मई महीने में करीब 7.5 रुपये की बढो़तरी की गई थी। ऐसे में क्रूड की कीमतों में गिरावट आने के बाद अब यह देखना होगा कि भारत में क्या पेट्रोल-डीजल के दामों में गिरावट आती है।