आज 7 नवंबर को देशभर में छोटी दिवाली मनाई जा रही है। इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। छोटी दिवाली को बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं, साफ-सफाई की जाती है और भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है।
क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली राक्षस था। उसने अपनी शक्ति के घमंड में देवताओं और मनुष्यों को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसने 16 हजार से अधिक कन्याओं को बंदी बना लिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध किया और बंदी कन्याओं को मुक्त कराया। मान्यता है कि नरकासुर के वध की खुशी में छोटी दिवाली मनाई जाती है। इसी कारण इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है।
छोटी दिवाली पर दीपक जलाने का महत्व
इस दिन घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि दीपक जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। कई जगहों पर यमराज के नाम का दीपक भी जलाया जाता है। इसे यम दीपदान कहते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।
रूप चौदस क्यों कहते हैं?
छोटी दिवाली को रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और शरीर पर तेल या उबटन लगाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से सौंदर्य और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन को रूप निखारने और खुद की देखभाल करने से भी जोड़ा जाता है।
कैसे मनाई जाती है छोटी दिवाली?
छोटी दिवाली के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और नए कपड़े पहनते हैं। घरों की सफाई और सजावट की जाती है। शाम को दीपक जलाए जाते हैं और भगवान गणेश, माता लक्ष्मी तथा भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। घरों में रंगोली बनाई जाती है और मिठाइयां बांटी जाती हैं। कई परिवारों में इस दिन से दिवाली के पकवान और उत्सव की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं।
छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली में क्या है अंतर?
छोटी दिवाली कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है, जबकि मुख्य दिवाली कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है। छोटी दिवाली का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से है, वहीं मुख्य दिवाली भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है। दोनों ही त्योहार अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। छोटी दिवाली केवल दीप जलाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमें सिखाती है कि अहंकार, बुराई और नकारात्मकता का अंत हमेशा होता है। यही वजह है कि दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला यह पर्व भी विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।